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मोटर का पैसा नहीं था, इस किसान ने बना दी हवा-पानी की मशीन

 मोटर का पैसा नहीं था, इस किसान ने बना दी हवा-पानी की मशीन

फोटो क्रेडिट: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

नई दिल्ली/भुवनेश्वर: भारत एक कृषि प्रधान देश है और लाखों किसानों की खून-पसीने की कमाई इसे सदियों से सिंचती आ रही है. देश का किसान, वर्षों से अभाव में है लेकिन अनाज उगाने की उसकी जिद कम नहीं हुई. हमारा किसान अभाव को अवसर में बदलना भी जानता है. सरकारी मदद का वह मोहताज नहीं और पैसे की कमी उसके कदम नहीं रोक सकती. ऐसे ही एक किसान हैं उड़ीसा के माहुर.

अपने इनोवेशन से न सिर्फ उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है बल्कि उनका ‘कमाल’ देखने के लिए दूर-दूर से किसान उनके खेत पर आ रहे हैं. उड़ीसा के मयूरभंज जिले के रहने वाले माहुर ने एक ऐसी अनोखी ‘पानी चकरी’ बनाई है जो बिना बिजली के चलती है. अत्यंत कम खर्च में इस चकरी की मदद से वो अपने तीन एकड़ खेत की सिंचाई का काम कर रहे हैं.

महज दूसरी कक्षा पास माहुर ने यह कमाल किया है. वह भी सिर्फ बांस, पुरानी प्लास्टिक के बोतल और कुछ अन्य कबाड़ से उन्होंने यह पानी की चकरी बनाई है. 35 साल के मयूर के द्वारा बनाई गई चकरी में 40 ब्लेड लगे हुए हैं. सभी ब्लेड से पानी की बोतल को जोड़ा गया है. जैसे ही चकरी घूमती है पानी के अंदर जाने वाली बोतल भर जाती है और उसका पानी विशेष बांस की नली से उनके खेतों तक पहुंचता रहता है.

बचपन में हम सबने ‘रहट’ के बारे में पढ़ा है लेकिन अपना खुद का रहट डिजाइन कर देना एक कमाल है. 10 फीट ऊंची यह चकरी कांता खैरी नदी में लगाई गई है. इस चकरी को चलाने के लिए पानी की धारा का ही इस्तेमाल किया जाता है. एक महीने में माहुर ने यह पूरा यंत्र तैयार किया है. माहुर कहते हैं कि खरीफ की फसल के बाद उनके खेत पानी की कमी से रबी की फसल के योग्य नहीं बन पा रहे थे. मोटर खरीदने का पैसा उनके पास नहीं था.

बस क्या था उन्होंने अपनी पानी की चकरी बनानी शुरू कर दी. इस चकरी की मदद से वो अब अपने खेतों में सरसों, गेहूं और सब्जियां लगा रहे हैं. आसपास के गांवों से किसान उनतक पहुंच रहे हैं और उनके इनोवेशन को समझने की कोशिश कर रहे हैं. यहां तक कि प्रशासन ने भी उनसे संपर्क साधा है और कहा है कि वे अपनी तकनीकि के बारे में ज्यादा से ज्यादा किसानों को बताएं.

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