Chhattisgarh Medical Rice: छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है. यहां धान की कई पारंपरिक किस्में सदियों से उगाई और संरक्षित की जाती रही हैं. इनमें कुछ किस्मों को उनके पोषण और औषधीय गुणों के कारण खास माना जाता है. इन्हें अब 'मेडिकल राइस' के नाम से भी पहचान मिल रही है. हालांकि, मेडिकल राइस किसी एक आधिकारिक किस्म का नाम नहीं है.
सही किस्म और बीज का करें चुनाव
मेडिकल राइस के नाम से छत्तीसगढ़ में कई पारंपरिक धान किस्मों का उल्लेख किया जाता है. इसलिए किसान खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या प्रमाणित बीज स्रोत से उपयुक्त किस्म की जानकारी लें. काले चावल की कुछ पारंपरिक किस्में भी राज्य में उगाई जाती हैं. खेत की मिट्टी, पानी और स्थानीय मौसम के अनुसार किस्म चुनना जरूरी है. धान की खेती के लिए खेत की अच्छी तैयारी, उचित जल प्रबंधन और संतुलित खाद का इस्तेमाल जरूरी होता है. बीज की गुणवत्ता अच्छी होने पर पौधों की बढ़वार बेहतर हो सकती है. खरपतवार और कीटों की नियमित निगरानी भी करनी चाहिए. स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उर्वरक और कीटनाशक का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा.
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खास चावल की बाजार में अलग पहचान
काले और पारंपरिक चावल को सामान्य धान की तुलना में अलग बाजार मिल सकता है. इनके पोषण संबंधी गुणों के कारण विशेष खाद्य पदार्थों के बाजार में मांग देखी जाती है. हालांकि, इन्हें किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं है. किसान अपनी उपज को साफ-सफाई, अच्छी पैकिंग और ब्रांडिंग के साथ बेचकर बेहतर ग्राहक तक पहुंच बना सकते हैं. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में किए गए एक पुराने अध्ययन में काले चावल की औसत उपज करीब 33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई थी. उसी अध्ययन में औसत लागत करीब 50,183 रुपये और शुद्ध आय करीब 68,134 रुपये प्रति हेक्टेयर बताई गई थी. ये पुराने आंकड़े हैं, इसलिए मौजूदा लागत और बाजार भाव अलग हो सकते हैं.
सीधे बाजार से जुड़कर बढ़ाएं कमाई
इस तरह की खास धान की खेती में किसान सिर्फ मंडी पर निर्भर रहने के बजाय एफपीओ, सहकारी संस्थाओं, स्थानीय दुकानों और सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना सकते हैं. साफ करके पैक किए गए चावल को स्थानीय और ऑनलाइन बाजार में बेचने की संभावना भी रहती है. इससे सामान्य धान की तुलना में अलग ग्राहक वर्ग बनाया जा सकता है. हालांकि, खेती से होने वाली कमाई हर किसान के लिए एक जैसी नहीं होगी. बीज, मजदूरी, सिंचाई, उत्पादन और बिक्री मूल्य के आधार पर मुनाफा बदल सकता है. इसलिए बड़े क्षेत्र में खेती शुरू करने से पहले छोटे स्तर पर परीक्षण करना और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा.
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