भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी बागवानी करने वाले किसान भाइयों के लिए आने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण है. वैसे तो आम के पेड़ों पर बौर आने का सिलसिला सर्दियों के अंत यानी जनवरी और फरवरी के महीनों में शुरू होता है, लेकिन इसकी असल तैयारी अक्टूबर और नवंबर के महीनों में ही की जाती है.
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर किसान भाई गर्मियों के मौसम में अपने बाग से आम की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार और भरपूर बौर चाहते हैं, तो उन्हें अभी से अपने बागों में विशेष पोषक तत्वों और खादों का प्रबंधन शुरू कर देना चाहिए. इस समय की गई थोड़ी सी मेहनत आने वाले सीजन में बंपर मुनाफा सुनिश्चित करेगी.
अक्टूबर-नवंबर में क्यों जरूरी है खास देखभाल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के जाने के बाद अक्टूबर और नवंबर का समय आम के पेड़ों के लिए आराम और बौर बनने की आंतरिक प्रक्रिया का समय होता है. इस दौरान पेड़ की जड़ों और टहनियों को सही पोषण मिलना बहुत आवश्यक है. यदि इस समय लापरवाही बरती गई या मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी रह गई, तो सर्दियों में पेड़ों पर बौर बहुत कम आते हैं या फिर बौर आने की जगह केवल नई हरी पत्तियां निकलने लगती हैं. इससे पूरी फसल प्रभावित होती है और बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इसलिए गर्मियों की बंपर फसल की नींव इसी समय रखी जाती है.
मिट्टी में अभी डालें यह खास ऑर्गेनिक और रासायनिक कॉम्बिनेशन
बाग से शानदार फ्लावरिंग हासिल करने के लिए सबसे पहला काम मिट्टी को ताकत देना है. इसके लिए वयस्क पेड़ों के चारों तरफ तने से करीब 2.5 से 3 मीटर की दूरी पर गोलाई में हल्की गुड़ाई करें. अब प्रति पेड़ लगभग 25 से 30 किलो अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी में मिलाएं. इसके साथ ही, वैज्ञानिक रूप से संतुलित पोषण के लिए प्रति पेड़ 200 से 300 ग्राम DAP और पोटाश का इस्तेमाल करें. इस समय नाइट्रोजन की मात्रा बहुत सीमित रखनी चाहिए, क्योंकि ज्यादा नाइट्रोजन देने से पेड़ में बौर के बजाय नई पत्तियां आने लगती हैं.
यह भी पढ़ें; अपनी छत पर कैसे लगाएं मोरिंगा का बाग, जान लें देखभाल का तरीका
बौर बढ़ाने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व हैं गेमचेंजर
जड़ों में खाद देने के अलावा इस मौसम में पेड़ों पर सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करना बेहद असरदार साबित होता है. कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि अक्टूबर और नवंबर के महीने में आम के पेड़ों पर बोरॉन और जिंक सल्फेट का छिड़काव अवश्य करना चाहिए. इसके लिए 1 ग्राम बोरॉन प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार करें और पूरे पेड़ पर अच्छी तरह स्प्रे करें. बोरॉन मिट्टी और पौधों की कोशिकाओं को मजबूत करता है, जिससे आने वाले समय में बौर का झड़ना रुकता है और फलियों का आकार बड़ा होता है. यदि पेड़ कमजोर लग रहा हो, तो विशेषज्ञ इस समय पोटेशियम नाइट्रेट या पानी में घुलनशील एनपीके के छिड़काव की भी सिफारिश करते हैं.
यह भी पढ़ें; केवल 5 भैंसों से शुरू करें अपना तबेला, ऐसे बनेगा बंपर मुनाफा
