पनीर घर के खाने से लेकर शादी पार्टी तक खूब इस्तेमाल होता है. लेकिन अगर पनीर तय स्टैंडर्ड पर खरा नहीं उतरता या उसमें मिलावट पाई जाती है, तो मामला सिर्फ स्वाद और क्वालिटी का नहीं रहता है. ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा विभाग कार्रवाई कर सकता है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने पनीर की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी मानक तय किए हैं.
पनीर में क्या होना जरूरी है?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के स्टैंडर्ड के मुताबिक पनीर दूध या मिल्क सॉलिड्स से तैयार किया जा सकता है. इसकी क्वालिटी जांचते समय नमी और दूध की चर्बी जैसे स्टैंडर्ड को देखा जाता है. सामान्य पनीर में नमी की अधिकतम सीमा 60 फीसदी और ड्राई मैटर के आधार पर मिल्क फैट कम से कम 50 फीसदी होना चाहिए. इसका मतलब यह है कि सिर्फ पनीर का सफेद दिखना ही उसकी क्वालिटी की गारंटी नहीं है. असली जांच उसके तय स्टैंडर्ड पर खरी उतरने से होती है.
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सीधे नकली कहना सही नहीं
कई बार बाजार में मिलने वाले पनीर को देखकर लोग उसे नकली या मिलावटी बता देते हैं. लेकिन सिर्फ देखकर किसी पनीर को नकली कहना सही नहीं है. इसकी सही असलियत जानने के लिए सैंपल की जांच जरूरी होती है. अगर किसी दुकान या डेयरी में पनीर को लेकर शिकायत मिलती है, तो फूड सैफ्टी ऑफिसर सैंपल लेकर उसकी जांच कर सकते हैं. जांच के बाद ही पता चलता है कि खाद्य पदार्थ तय स्टैंडर्ड से कम है, गलत तरीके से बेचा गया है या सेहत के लिए असुरक्षित है. खाद्य पदार्थों की जांच के लिए तय जांच के तरीकों और लैब का इस्तेमाल करता है.
कितनी हो सकती है कार्रवाई?
यहां एक जरूरी बात समझना भी जानना है कि हर मामले में एक जैसा जुर्माना नहीं लगता है. कार्रवाई इस बात पर निर्भर होती है कि नियमों का उल्लंघन किस तरह का है और खाद्य पदार्थ सेहत के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है. अगर किसी मामले में मिलावट करने वाला पदार्थ पाया जाता है, तो कानून के तहत अलग अलग स्थिति में जुर्माने का प्रावधान है. वहीं सेहत के लिए असुरक्षित खाना पाए जाने पर मामला और संजीदा हो सकता है. इसलिए किसी एक तय रकम को हर नकली पनीर के मामले में लागू बताना सही नहीं होता है.
इन लोगों पर भी है नियम
दूध और दूध से बने सामान का कारोबार करने वाले दुकानदारों और डेयरी चलाने वाले को भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना होता है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरणके नियमों में दूध और मिल्क प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज, पैकिंग, बिक्री और सप्लाई से जुड़े नियम मैजूद हैं. इसलिए अगर किसी डेयरी से पनीर का सैंपल लिया जाता है और जांच में गड़बड़ी सामने आती है, तो उसके बाद की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और उल्लंघन की कैटेगरी के हिसाब से तय होगी. ग्राहक के लिए भी जरूरी है कि सिर्फ शक होने पर किसी दुकान या प्रोडक्ट को नकली बताने से बचें.
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