Drought Resilient Crops: देश में कई जगह बारिश कम होने से खेती करना मुश्किल हो रहा है. इस साल कम बारिश और लंबे सूखे की वजह से कई राज्यों के किसान भाई काफी परेशान हैं. उनके मन में बस यही एक सवाल है कि जब खेत में पानी कम हो, तो आखिर कौन सी फसल बोएं जिससे घाटा कम से कम हो.
ऐसे हालात में धान या ज्यादा पानी मांगने वाली दूसरी फसलें लगाना समझदारी नहीं है. किसानों को चाहिए कि वे अपने इलाके की मिट्टी, मौसम और पानी को देखकर ही फसल चुनें. इस मुश्किल समय में कम पानी में पकने वाली (सूखे की मार झेलने वाली) फसलें लगाना ही सबसे अच्छा और सुरक्षित रास्ता है.
बाजरा और ज्वार की खेती पर दें ध्यान
जिन इलाकों में बारिश कम होती है, वहां किसान बाजरा और ज्वार बो सकते हैं. खास तौर पर बाजरा एक ऐसी फसल है जो तेज गर्मी और पानी की किल्लत दोनों को बड़े आराम से झेल लेती है. इसकी जड़ें जमीन में काफी नीचे तक जाती हैं, जिससे पौधे को अंदर से ही नमी (पानी) मिल जाती है. राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे कम बारिश वाले राज्यों में तो लोग पहले से ही खूब बाजरा उगाते आ रहे हैं. इसी तरह, पानी की कमी वाले कुछ इलाकों में ज्वार की खेती करना भी किसानों के लिए एक बहुत बढ़िया और फायदे का सौदा हो सकता है.
अरहर, मूंग और उड़द भी हो सकती हैं विकल्प
अगर खेत में पानी कम है, तो किसान दलहन फसलों पर भी ध्यान दे सकते हैं. अरहर, मूंग और उड़द जैसी फसलें कई इलाकों में कम पानी वाली खेती के लिए फायदेमंद रहती हैं. इनसे दाल मिलती है और मिट्टी की सेहत को बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है. लेकिन इन फसलों की बुवाई का सही समय और किस्म इलाके के हिसाब से अलग हो सकती है. इसलिए बीज खरीदने से पहले कृषि विशेषज्ञ या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना बेहतर रहेगा.
यह भी पढ़ें: बंजर जमीन को हरा भरा कर देंगी ये तकनीकें, बेहद आसान है इनका इस्तेमाल
तिल और मूंगफली पर भी कर सकते हैं विचार
कम पानी वाले खेतों में तिल जैसी तिलहनी फसल भी एक विकल्प हो सकती है. कुछ इलाकों में मूंगफली की खेती भी की जाती है, लेकिन इसके लिए मिट्टी और फसल की जरूरत के मुताबिक नमी होना जरूरी है. इसलिए सिर्फ यह देखकर फसल न चुनें कि उसे कम पानी चाहिए. यह भी देखें कि आपके खेत में वह फसल ठीक से उग पाएगी या नहीं.
बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सूखे जैसे हालात में केवल फसल बदलना ही काफी नहीं है. खेत की नमी बचाना, समय पर बुवाई करना और जरूरत के हिसाब से सिंचाई करना भी जरूरी है. खेत में फसल के अवशेष बिछाने से मिट्टी की नमी बचाने में मदद मिल सकती है. साथ ही, कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों के बारे में भी जानकारी लें.
यह भी पढ़ें: गेहूं की इस किस्म से 77 क्विंटल तक पैदावार, प्रोटीन और जिंक भी भरपूर
