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दूध से ज्यादा कमाई करता है गाय का गोबर, जानें कैसे बनता है पैसा?

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ABP News
September 13, 20264 min read
दूध से ज्यादा कमाई करता है गाय का गोबर, जानें कैसे बनता है पैसा?

भारत में बड़े स्तर पर डेयरी फार्मिंग की जाती है. गांवों के साथ अब शहरों के आसपास भी लोग गाय पालकर दूध का बिजनेस कर रहे हैं. आमतौर पर डेयरी चलाने वाले पशुपालकों की कमाई दूध बेचने पर टिकी रहती है. वहीं चारा. दवाइयों और पशुओं की देखभाल पर हर महीने अच्छा खासा पैसा खर्च होता है. कई बार दूध के भाव कम मिलने से पशुपालकों के लिए सही मुनाफा निकालना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में डेयरी से निकलने वाली हर चीज का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी हो जाता है.

गाय का गोबर भी डेयरी फार्म से रोज निकलता है. कई पशुपालक इसके सिर्फ उपले ही बनाते हैं तो कई बेकार समझकर फेंक देते हैं. जबकि यह गोबर कमाई का एक मजबूत जरिया बन सकता है. खेती में ऑर्गेनिक खाद की बढ़ती डिमांड ने इसके लिए बड़ा मार्केट तैयार कर दिया है. गाय के गोबर को सही प्रोसेस से वर्मीकम्पोस्ट में बदलकर बेचा जा सकता है. चलिए आपको बताते हैं कैसे आप गाय के गोबर से बना सकते हैं वर्मीकम्पोस्ट.

गोबर को इस तरह करें तैयार

वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने के लिए गाय का ताजा गोबर सीधे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ताजा गोबर में काफी गर्मी होती है. इससे खाद बनाने के लिए छोड़े गए केंचुओं को नुकसान पहुंच सकता है. सबसे पहले गोबर को किसी खुली और साफ जगह पर इकट्ठा करें. इसमें जरूरत के हिसाब से पानी मिलाकर करीब सात दिनों के लिए छोड़ दें. इस दौरान गोबर को एक से दो बार पलट सकते हैं. इससे उसकी गर्मी कम होने और मिथेन गैस बाहर निकलने में मदद मिलेगी.

गोबर तैयार होने के बाद ऐसी जगह चुनें जहां सीधी धूप और बारिश न आती हो. जमीन पर मोटी प्लास्टिक शीट बिछाकर करीब 9 X 4 मीटर का बेड बनाया जा सकता है. जगह कम होने पर बेड का साइज छोटा भी रखा जा सकता है. अब गोबर को बेड पर फैलाकर उसमें केंचुए छोड़ दें. इसके ऊपर सूखी पराली और जूट की बोरी डाल सकते हैं. नमी बनाए रखने के लिए समय समय पर पानी का हल्का छिड़काव करें. ध्यान रखें कि बेड में पानी जमा न हो.

करीब दो महीने में तैयार होगी खाद

केंचुए गोबर और उसमें मौजूद ऑर्गेनिक मटेरियल को धीरे धीरे बारीक खाद में बदल देते हैं. इस पूरी प्रोसेस के दौरान बेड की नमी पर नजर रखना सबसे जरूरी है. गोबर ज्यादा सूखने पर केंचुए ठीक से काम नहीं करेंगे. वहीं लगातार पानी भरा रहने से खाद खराब हो सकती है. गर्मियों में बेड को छाया में रखें और जरूरत पड़ने पर पानी का छिड़काव बढ़ा दें. सर्दियों में बहुत ज्यादा पानी डालने से बचना चाहिए.

आमतौर पर करीब दो महीने में वर्मीकम्पोस्ट तैयार हो जाती है. तैयार खाद का रंग गहरा और बनावट चाय की पत्ती जैसी भुरभुरी दिखाई देती है. खाद तैयार होने के बाद कुछ दिनों के लिए पानी देना रोक दें. इसके बाद खाद को एक तरफ इकट्ठा करके केंचुओं को अलग किया जा सकता है. इन्हीं केंचुओं को अगले बेड में दोबारा इस्तेमाल करें. तैयार वर्मीकम्पोस्ट को छानकर कुछ समय छाया में सुखाएं. इसे तेज धूप में रखने से बचना चाहिए. इसके बाद खाद को पांच, दस और पच्चीस किलो के बैग में पैक किया जा सकता है.

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हर महीने इतनी हो सकती है कमाई

अगर आप शुरुआत में 20 बेड बनाते हैं तो इससे करीब तीन महीने में 17 क्विंटल वर्मीकम्पोस्ट तैयार की जा सकती है. इस उत्पादन से लगभग 10 हजार रुपये की शुरुआती बिक्री हो सकती है. काम का अनुभव और ग्राहक बढ़ने पर बेड की संख्या बढ़ाई जा सकती है. करीब 200 बेड होने पर हर महीने लगभग 30 टन वर्मीकम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है. खाद पांच रुपये प्रति किलो बिकने पर 30 टन से करीब 1.50 लाख रुपये की बिक्री होगी. दस रुपये किलो का रेट मिलने पर यह आंकड़ा 3 लाख रुपये तक पहुंच सकता है.


यह पूरी रकम मुनाफा नहीं होगी. इसमें पैकिंग. मजदूरी. ट्रांसपोर्ट. पानी और दूसरे खर्च घटाने होंगे. पशुपालक के पास अपना गोबर और जगह होने से लागत कम रखी जा सकती है. वर्मीकम्पोस्ट को आसपास के किसानों. नर्सरी. ऑर्गेनिक फार्म और घर में पौधे उगाने वाले ग्राहकों को बेचा जा सकता है. छोटे पैकेट बनाकर रिटेल में बेचने पर थोक बिक्री के मुकाबले अच्छा भाव मिल सकता है. इसके अलावा गोबर से उपले और गोबर भी बनाई जा सकती है. इन कामों से भी अलग से कमाई की जा सकती है.

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