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मधुमक्खी पालन पर मिलेगी बंपर सब्सिडी, ऐसे उठाएं फायदा

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ABP News
August 28, 20264 min read
मधुमक्खी पालन पर मिलेगी बंपर सब्सिडी, ऐसे उठाएं फायदा

खेती-किसानी के साथ अगर आप एक और काम शुरू करके कमाई करना चाहते हैं. तो फिर मधुमक्खी पालन यानी बीकीपिंग आपके लिए एक बेहतरीन बिजनेस साबित हो सकता है. इसे शुरू करने के लिए न तो आपको किसी बड़ी उपजाऊ जमीन की जरूरत होती है और न ही दिन-रात की भारी मजदूरी करनी पड़ती है. किसान अपने खेत की मेड़ों बाग-बगीचों में भी बॉक्स रखकर इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं.

इस काम में एक अच्छी बात यह है कि सरकार खुद किसानों और ग्रामीण युवाओं की इनकम बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन पर काफी अच्छी सब्सिडी और फाइनेंशियल सपोर्ट दे रही है. उद्यान विभाग और राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन मिशन के तहत बॉक्स खरीदने, कॉलोनी सेट करने और जरूरी सामान पर भारी आर्थिक छूट दी जा रही है. शुद्ध शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और पराग बेचकर भी डबल मुनाफा होता है. चलिए आपको बताते हैं कि सरकारी मदद लेकर कैसे यह बिजनेस शुरू करें.

सरकारी सब्सिडी से काम होगा आसान

मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और अलग-अलग राज्यों की सरकारें मिलकर कई लाभकारी योजनाएं चला रही हैं. राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन और उद्यान विभाग के जरिए किसानों को 70 से 85 फीसदी तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप 10 से 50 बी-बॉक्स का सेटअप तैयार करते हैं. तो आपकी जेब से केवल नाममात्र का 15 से 30 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च होता है.

बाकी पूरा खर्च सरकार वहन करती है. सब्सिडी के दायरे में लकड़ी के बी-बॉक्स, मधुमक्खी के छत्ते, शहद निकालने वाली एक्सट्रैक्टर मशीन, सेफ्टी सूट और जालीदार दस्ताने सब कुछ शामिल हैं. महिला किसानों, छोटे-सीमांत किसानों और एससी-एसटी वर्ग के लाभार्थियों को इसमें प्राथमिकता और एक्स्ट्रा आर्थिक छूट का फायदा मिलता है. इस सरकारी मदद की बदौलत बेहद कम पूंजी वाला युवा भी बिना किसी आर्थिक दबाव के अपना खुद का हनी प्रोडक्शन यूनिट आसानी से शुरू कर सकता है.


फ्री ट्रेनिंग, बॉक्स सेटअप और रखरखाव के तरीके

बिना सही जानकारी और ट्रेनिंग के मधुमक्खी पालन का काम शुरू नहीं करना चाहिए. इसके लिए आपको पहले ट्रेनिंग ले लेनी चाहिए. इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र और खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग समय-समय पर 5 से 7 दिनों की प्रैक्टिकल और मुफ्त ट्रेनिंग देते हैं. इस ट्रेनिंग में मधुमक्खियों की देखरेख रानी मक्खी की पहचान, बॉक्स की साफ-सफाई, बीमारियों से बचाव और शहद निकालने की सही तकनीक सिखाई जाती है.

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद विभाग की तरफ से बकायदा सर्टिफिकेट मिलता है. जो सब्सिडी और बैंक लोन लेने में काफी काम आता है. बॉक्स हमेशा ऐसी जगह रखने चाहिए जहां आसपास सरसों, सूरजमुखी, लीची, यूकेलिप्टस या फल-फूलों के बगीचे हो मक्खियों को भरपूर मकरंद और पराग मिल सके. बॉक्स के पास साफ पीने का पानी और छाया का सही इंतजाम होना चाहिए जिससे गर्मियों में मक्खियों को किसी तरह का स्ट्रेस न हो और वह तेजी से शहद बनाएं.

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कितनी हो सकती है कमाई?

मधुमक्खी पालन का असली मजा यह है कि इसमें सिर्फ एक नहीं बल्कि कई तरह से कमाई होती है. एक स्वस्थ बी-बॉक्स से सालभर में मौसम के हिसाब से 25 से 40 किलो तक शुद्ध और नेचुरल शहद आराम से निकल आता है. आज के दौर में प्योर और अनप्रोसेस्ड ऑर्गेनिक शहद की बाजार में जबरदस्त मांग है. जो 300 से 500 रुपये प्रति किलो तक हाथों-हाथ बिक जाता है. शहद के अलावा मधुमक्खी का मोम, प्रोपोलिस और रॉयल जेली जैसी चीजें कॉस्मेटिक और फार्मा कंपनियों को बहुत ऊंचे दामों पर बेची जाती हैं.

इसके साथ ही सबसे बड़ा साइलेंट फायदा यह है कि मधुमक्खियों के परागण यानी पॉलिनेशन की वजह से आपके आसपास की फसलों और फलों की पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाती है. 50 बॉक्स के छोटे से सेटअप से भी सारा खर्च काटकर हर साल 2.5 से 3 लाख रुपये का मुनाफा आसानी से बैंक खाते में आता है.


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