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“मैजिक राइस” का नाम सुना है ? मैगी से भी कमाल है यह देसी खाना

 “मैजिक राइस” का नाम सुना है ? मैगी से भी कमाल है यह देसी खाना

नई दिल्ली: आमतौर पर हम चावल को पानी में उबाल कर ही खाने के लिए तैयार करते हैं. लेकिन, क्या आप जातने हैं हमारे देश में एक ऐसी भी चावल की किस्म है जिसे उबालने की जरूरत नहीं पड़ती. सिर्फ पानी डाला और कुछ ही मिनटों में वह खाने के लायक हो जाता है. आश्चर्य़ की बात यह है कि यह बिल्कुल आर्गेनिक ढंग से उगाया जाता है.

इस किस्म के चावल को तेलंगाना के श्रीरामुलापल्ली गांव के श्रीकांत ने उगाया है. खास बात यह है कि वे इसे असम से लेकर आए हैं. असम की जनजातीय लोग इसे उगाते हैं और सेना भी इस चावल का इस्तेमाल खाने के लिए करती है. लेकिन, इसकी खेती अब बहुत कम हो गई है. हालांकि, श्रीकांत ने इसे उगा कर एक क्रांति की शुरूआत कर दी है.

श्रीकांत बताते हैं कि यह चावल सिर्फ पानी डाल भर देने से तैयार हो जाता है. इसमें तमाम पोषक तत्व भी हैं जो कई बीमारियों से बचाते हैं. साथ इसे उगाने में वो किसी रसायन का प्रयोग नहीं करते हैं. इसके हाजमें में थोड़ा वक्त लगता है. आम चावलों की अपेक्षा यह देर से पचता है. इसे तैयार होने में 20 से 30 मिनट लगते हैं.

एक और खास बात यह है कि अगर इसे ठंडे पानी में डाला जाए तो ठंडा चावल बनता है और गरम चावल खाना हो तो गरम पानी में डाल दीजिए. गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार इस चावल में 10.73 प्रतिशत फाइबर और 6.8 प्रतिशत प्रोटीन है. साथ ही इसकी फसल को तैयार होने में करीब 145 दिन लगते हैं.

श्रीकांत पहले रसायन से युक्त खेती करते थे लेकिन रेडियो पर सुभाष पालेकर का विचार सुनने के बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती का फैसला किया. फिर उन्होंने असम से बोकोसाल नाम के चावल की किस्म लाने का फैसला किया. श्रीकांत ने नौ राज्यों में घूम-घूम कर अपने पास कुल 120 किस्म के चावल के बीज इकट्ठा किए हैं. उनके पास बीज खरीदने वाले भी बहुत आते हैं.

हालांकि जानकारों का कहना है कि चूंकि यह चावल बिना उबाले ही तैयार हो जाता है इसलिए मानव के पाचन तंत्र पर इसका प्रभाव कैसे होता है इस बारे में अध्ययन चल रहा है. विलुप्त होती इस प्रजाति को श्रीकांत ने एक नई जान दे दी है. खुद उनसे यह बीज खरीदने के लिए काफी लोग आ रहे हैं. इस पर और शोध हुआ तो पूरे देश में यह पॉपुलर हो सकता है.

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