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बांस बन रहा नई ‘लकड़ी’, इस्तेमाल सुन आप उगाने लगेंगे Bamboo

 बांस बन रहा नई ‘लकड़ी’, इस्तेमाल सुन आप उगाने लगेंगे Bamboo

नई दिल्ली: भारतीय समाज में बांस का बहुत महत्व है. चाहें वो कोई हिंदू कर्मकांड हो या फिर किसी धर्म के लोगों की बनी मड़ई. ड्रॉइंग रूम में शुभ माहौल के लिए रखा गया बंबू ट्री हो या फिर बांस से बने खिलौने. बांसूरी की धुन किसे अच्छी नहीं लगती और हमारे देश में कई हिस्सों में बांसों के अलग-अलग हिस्सों की सब्जियां और अंचार भी बनते हैं.

लकड़ी का मजबूत विकल्प बनकर उभरा

अब आप कहेंगे कि किसान रिपोर्टर आपको यह क्यों बता रहा है, तो इसके पीछे खास कारण है. जी हां ! बांस अब दुनियाभर में लकड़ी का नया विकल्प बनने जा रहा है. निर्माण कार्य में इसका इस्तेमाल तेजी से होने लगा है जिससे लकड़ी की निर्भरता कम हो जाएगी. साथ ही अपनी खास गुणवत्ता के कारण यह प्रकृति के लिए भी बेहतर है.

PWD ने दे दी है इजाजत

महाराष्ट्र लोक निर्माण विभाग ने 12 अलग-अलग बांस से बनी वस्तुओं को आधुनिक निर्माण कार्य में इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है. इनका उपयोग सीमेंट के साथ किया जा सकता है. लोक निर्माण विभाग, महाराष्ट्र के सचिव उल्हास देबाद्वार ने जानकारी दी है कि निर्माण कार्यों में बांस का उपयोग करने की अनुमति दे गई है. इसके लिए स्टेट शेड्यूल ऑफ रेट (SSR) 2020-21 में बांस को जोड़ गया है.

जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं

बांस के विशेषज्ञ और कोंकण बंबू एंड केन डेवेलॉपमेंट सेंटर (KONBAC) संजीव कापड़े ने कहा कि SSR में बांस को शामिल करने के पीछे सफल प्रयोग है. उन्होंने जानकारी दी कि बंबू रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (BRTC) के एक लाख स्क्वायर फीट का निर्माण कार्य बांस के जरिए ही किया गया है.

नई क्रांति की है तैयारी

माना जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के बाद पूरे देश में निर्माण कार्यों में एक नई क्रांति आ सकती है. दावा है कि बांस के इस्तेमाल से निर्माण की लाइफ 40-50 सालों की होती है. पूरी दुनिया में 16,00 से ज्यादा बांसों की किस्म पाई जाती है.

दुनिया में सबसे ज्यादा बांस यहां उगता है

इस बीच बांस एक महत्वपूर्ण बिल्डिंग मैटेरियल के तौर पर पूरी दुनिया में उभर रहा है. यह रीन्यूएबल है और इसकी उपलब्धता भी अधिक है. दुनिया के 65 प्रतिशत बांस उत्पाद इस्ट एशिया से ही दुनिया को मिलते हैं. ऐसे में बांस की संभावनाएं ज्यादा हैं.

बांस उगाना एक बड़ा बिजनेस

ऐसे में एग्रो-फॉरेस्टिंग के तहत बांस उगाना एक बड़ा बिजनेस हो सकता है. आने वाले दिनों में इसकी मांग बढ़ने वाली है. साथ ही चूंकि दुनिया में ईस्ट एशिया इसका सबसे बड़ा उत्पादक है तो दुनिया की नजर भी इधर ही टिकी हुई है. मांग के हिसाब से अगर बांस उगाया जाए तो मोटा मुनाफा आ सकता है.

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