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#बिल_को_जानो: छोटे किसानों का बड़ा वरदान है FPO, जान लीजिए सबकुछ इसके बारे में एक क्लिक में…

 #बिल_को_जानो: छोटे किसानों का बड़ा वरदान है FPO, जान लीजिए सबकुछ इसके बारे में एक क्लिक में…

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों के तहत कांट्रैक्ट फार्मिंग का प्रावधान मुख्य रूप से किया गया है. किसान अब इसके माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकेंगे. इसमें कई तरह के प्रावधान हैं लेकिन सबसे अहम जो व्यवस्था इस में इस्तेमाल होने वाली है वह है FPO की. कृषक उत्पादक संगठन यानि FPO (Farmer Producer Organization) ही वह केंद्रबिंदु होगा जिसके जरिए स्पांसर किसानों से करार कर सकेगा.

इससे किसानों और स्पांसर दोनों को लाभ मिलेगा. छोटे और मझोले किसानों के लिए तो यह किसी वरदान से कम नहीं. यह कहा जा सकता है कि FPO आने वाले दिनों में कृषि का एक बड़ा ‘खिलाड़ी’ बनने वाला है. आइए आज इसी के बारे में बात करते हैं कि क्या है FPO और आप भी कैसे इसका लाभ ले सकते हैं …

पहले से ही सरकार कर ही तैयारी:

सरकार ने पहले ही इलैक्ट्रानिक राष्ट्रीय मंडी (eNAM) की स्थापना कर चुकी है. इस व्यवस्था में FPO बड़ी भूमिका में हैं और ताजा कानून के बाद भी इनकी महत्ता बढ़ गई है. ऐसे में केंद्र और कई राज्य सरकारें इसे लेकर काफी गंभीर हैं. यूपी में तो मुख्यमंत्री ने 60 हजार एफपीओ लॉंच करने का मन बना लिया है.

ऐसे काम करता है FPO:

किसान उत्पादक संगठन असल में किसानों का एक समूह होता है. जो वास्तव में कृषि का काम कर रहा होता है. इसमें एक गांव, एक इलाके के किसान शामिल हो सकते हैं. इसके जरिए रजिस्ट्रेशन करा कर किसान उत्पादक कंपनी के तौर पर फसलों का व्यापार भी कर सकता है. कहते हैं न एकता में शक्ति होती है तो यह भी किसानों को शक्ति प्रदान करता है.

यह है FPO:

यह है FPO:

  • कम से कम 10 किसानों का समूह होना चाहिए
  • प्रति किसान 1000 रुपए देकर शेयर ले सकता है
  • बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में 5 से 15 किसान हो सकते हैं
  • एक पद सीईओ का होता है जिसका वेतन तीन साल तक नाबार्ड से मिलता है
  • बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के अलावा अनेक संख्या में किसान सदस्य बन सकते हैं
  • SFAC और नाबार्ड ही FPO के शुरूआती खर्च उठाते हैं
  • साथ ही तकनीकों आदि की जानकारी और प्रशिक्षण भी दोनों संस्थाएं देती हैं
  • शुरूआती तीन साल के अलावा सहायता की अवधि सरकार बढ़ा भी सकती है
  • कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020 के नए प्रावधानों में FPO के जरिए किसान बड़े स्पांसर्स से करार कर सकता है, अपनी शर्तों पर

FPO के लाभ-

  • यह एक संगठन होने के कारण एफपीओ के सदस्य के रूप में किसानों को बेहतर व्यापार का अवसर देगा. (उन्हें जींसों को प्रतिस्पर्धा मूल्यों पर खरीदने या बेचने का अवसर मिलेगा)
  • किसान अपने लिए बेहतर विपणन के अवसर तलाश पाएगा. एक साथ काम करने में उत्पादन, भंडारण और परिवहन आदि का खर्च कम वहन करना पड़ेगा.
  • एफपीओ अपने उत्पाद की कीमत बढ़ाने के लिए छंटाई/ग्रेडिंग, पैकेजिंग आदि जैसी गतिविधियाँ शुरू कर सकता है. इससे ब्रांडिंग का भी काम होगा
  • एफपीओ के गठन से ग्रीन हाउस, कृषि मशीनीकरण, शीत भण्डारण, कृषि प्रसंस्करण इत्यादि जैसे कटाई पूर्व और कटाई पश्चात संसाधनों के उपयोग में सुविधा मिलेगी.
  • एफपीओ के जरिए किसान किसी सीमा में बंधे रहने के लिए बाध्य नहीं है. बल्कि सीधे कंपनी के तौर पर अपना सामान विदेशों में भेज सकते हैं.

क्या कह रहे हैं किसान:

बिहार के नालंदा जिले के जुनेदी गांव के किसान विरेश कुमार कहते हैं कि संगठन में शक्ति होती है और FPO इसी का प्रतीक है. वे खुद एफपीओ चलाते हैं और पहले से कम समय और लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. विरेश का कहना है कि अगर वे संगठन में हैं तो मार्केट उनके पास आता है और अकेले के बाजार के धक्के खाने होते हैं. साथ ही एक ही स्थान पर सरकारी सुविधाओं का भी लाभ लेना आसान होता है.

यहां करें शुरूआत:

एफपीओ गठित करने के इच्छुक किसान यहां ई- मेल: sfac@nic.in से संपर्क कर सकते हैं

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