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#बिल_को_जानो: जानिए क्या है ‘एंट्री 33’, कृषि कानूनों में क्यों पड़ी इसकी जरूरत

 #बिल_को_जानो: जानिए क्या है ‘एंट्री 33’, कृषि कानूनों में क्यों पड़ी इसकी जरूरत

दूर-दूर के बुजुर्ग भी आए हैं

नई दिल्ली: केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर काफी विवाद चल रहा है. कई बार इसकी संवैधानिकता पर सवाल उठाया गया तो कुछ लोगों ने सरकार को भी घेरने की कोशिश की. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सर्वोच्च अदालत ने कानून के मामले में एक कमेटी का गठन कर दिया. अदालत ने साफ किया कि जो कामेटी रेकेमेंड करेगी उसी पर आगे विचार होगा.

इससे पहले यह जानना जरूरी है कि केंद्र और राज्य के बीच इस कानून को लेकर क्यों खींचतान मची हुई है. साथ ही यह भी आखिर संविधान के किस अधिकार का प्रयोग करते हुए सरकार ने ये तीन कृषि कानून बनाए हैं. तो आईए थोड़ा विस्तार से जानते हैं कि पूरा मामला क्या है.

केंद्र सूचि vs राज्य सूचि

दरअसल संविधान में देश को चलाने के लिए कई मामलों को अलग-अलग सूचि में बांटा गया है. इसमें केंद्र सूचि और राज्य सूचि शामिल है. इसके साथ ही समवर्ती सूचि का भी प्रावधान है जहां कुछ चीजों पर दोनों के अधिकार हैं. जैसे कानून व्यवस्था राज्य सूचि में है जबकि सेना केंद्र सूचि में.

समवर्ती सूचि और केंद्र

समवर्ती सूचि में कई कॉमन विषय हैं साथ ही इसमें प्रावधान है कि यदि एक विषय पर केंद्र और राज्य दोनों ने कानून बना दिया हो तो केंद्र का प्रावधान ही माना जाएगा. राज्य का बनाया कानून स्वत: ही निरस्त माना जाएगा.

एंट्री 33 की भूमिका

अब आते हैं जो मुख्य सवाल है कि अगर कृषि, राज्य सरकार के अधिकार में आती है तो केंद्र ने उसपर कानून कैसे बना दिया. और, यहीं पर समवर्ती सूचि की एंट्री-33 की भूमिका आ जाती है.

कृषि, ट्रेड-कॉमर्स और प्रोडक्शन-सप्लाई आदि सब राज्य की सूचि में है. लेकिन, 1954 में नेहरू सरकार ने एक विशेष अधिकार के तहत समवर्ती सूचि में एंट्री-33 का प्रावधान कर दिया था (संविधान के तीसरे संसोधन में यह हुआ था) जिसके बाद कृषि और इसके उत्पाद संबंधित फैसले केंद्र भी सकती है.

एंट्री-33 में साफ है कि कृषि और उत्पाद से संबंधित कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार के पास अधिकार है. साथ ही राज्य सूचि की अलग-अलग एंट्रीज में जहां कृषि का जिक्र है, कहा गया है कि यह लागू तो है लेकिन समवर्ती सूचि के एंट्री-33 अगर बाधित न होती हो तब.

इसी प्रावधान का इस्तेमाल मोदी सरकार ने भी किया है. इसके तहत केंद्र ने तीन कानून बनाएं जो वास्तव में एक की कानून या प्रयास के तीन हिस्से हैं. इनको अलग-अलग करने के बजाए अगर साथ में देखा जाए तो बेहतर होगा.

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