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#बिल_को_जानो: APMC मंडियों में ‘टैक्स’ से ‘टक्कर’ लेता किसान, पसीने पर हावी होता पैसा

 #बिल_को_जानो: APMC मंडियों में ‘टैक्स’ से ‘टक्कर’ लेता किसान, पसीने पर हावी होता पैसा

नई दिल्ली: कृषि बिल को लेकर एक तरफ आंदोलन चल रहा है तो दूसरी तरफ सरकार अपना पक्ष पेश कर रही है. लेकिन, जब हमें एपीएमसी मंडियों के अंदर के कामकाज की तलाश में जुटते हैं तो पता चलता है कि यहां हमारे देश का बेचारा किसान किस प्रकार से ‘टैक्स’ से ‘टक्कर’ ले रहा है.

तो असल में एपीएमसी मंडियों में कई तरह के टैक्स लगते हैं जबकि आम आदमी को यही मालूम है कि किसान को किसी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ता है. देश में किसानों को ज्यादातर अपनी फसलों को एपीएमसी मंडियों के जरिए ही बेचना पड़ता है. ऐसे में उनकी मजबूरी का फायदा भी उठाया जाता है. देश में करीब दो हजार 477 मुख्य एपीएमसी मंडिया हैं जबकि चार हजार 843 सब-मार्केट्स हैं.

जैसे ही किसान मंडी के गेट पर अपनी फसलें लेकर पहुंचता है उसके टैक्स/लेवी का सिलसिला शुरू हो जाता है. ऐसे में माना जा रहा है कि यदि किसान एपीएमसी की मजबूरी से मुक्त होगा तो उसकी बचत भी हो सकती है. बहरहाल यह तो भविष्य ही बताएगा.

यह हैं अलग-अलग टैक्स के प्रकार:

मार्केट फीस

लाइसेंस फीस

वेयर हाउस फीस

लोडिंग एजेंट फीस

ट्रांजेक्शन फीस

मंडी टैक्स

वैट

अलग अलग राज्यों और मंडियों में फीस का स्ट्रक्चर अलग-अलग है. अगर चावल की फसल की बात करें तो सन 2014-15 में मौजूद आंकड़े के अनुसार आंध्र प्रदेश में चावल की फसल पर 14.5% तक पहुंच जाता है जिसपर वैट अलग से लगता है. इसके साथ ही करीब 10% उड़ीसा और पंजाब में लिया जाता है. गेहूं की फसल पर भी अलग-अलग राज्यों में अलग फीस का प्रवधान है.

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