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गैर बासमती चावल ने जगाई उम्मीद, कोरोना संकट के बीच निर्यात में इजाफा

 गैर बासमती चावल ने जगाई उम्मीद, कोरोना संकट के बीच निर्यात में इजाफा

नई दिल्ली: कोरोना संकट के दंश से कृषि भी जूझ रही है. लेकिन, इन सब के बीच किसानों के लिए एक बेहतर खबर भी आई है. वह है गैर बासमती चावलों के निर्य़ात में इजाफा होना. हालांकि अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात भी बढ़ा है लेकिन गैर बासमती चावल ने तो कमाल ही कर दिया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जुलाई के बीच कृषि उत्पादों के निर्यात में 8.50% की वृद्धि दर्ज की गई है जबकि गैर बासमती ने 68 प्रतिशत की रिकार्ड बढ़ोत्तरी दर्ज की है.

77 लाख 70 हजार 193 मीट्रिक टन खाद्य उत्पादों का निर्य़ात

यह आंकड़े काफी उत्साहवर्धक हैं और इसे बढ़ाने के प्रयास भी चल रहे हैं. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्य़ात विकास प्राधिकरण (APEDA) की ओर से दी गई जानकारी सकारात्मक है. APEDA के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2020 के बीच 77 लाख 70 हजार 193 मीट्रिक टन खाद्य उत्पादों का निर्य़ात हुआ है जो कि पिछले वर्ष इसी अवधि में 69 लाख 87 हजार 325 मीट्रिक टन था. मूल्यों पर नजर डालें तो 2020 में इसी अवधि में 41 हजार 272 करोड़ रुपए की कीमत का निर्यात हुआ है जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 38 हजार 43 करोड़ रुपए था.

भारतीय चावल थाई चावल से करीब 100 डॉलर/टन सस्ता

इसी प्रकार अप्रैल-जुलाई 2020 में 29.9 लाख टन गैर बासमती चावल का निर्य़ात किया गया है जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 17.8 लाख टन से 68 प्रतिशत ज्यादा है. जानकारों का कहना है कि थाइलैंड में सूखे के कारण भारतीय गैर बासमती चावलों का निर्य़ात बढ़ा है. इसके साथ ही भारतीय चावल थाई चावल से करीब 100 डॉलर/टन सस्ता है. अफ्रीका में इसकी मांग इस साल काफी ज्यादा रही. भारत विश्व के 170 देशों में चावर का निर्यात करता है.

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