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किसान आंदोलन के काम आ गए टिकैत के आंसू, धरना स्थल नहीं हुआ खाली

 किसान आंदोलन के काम आ गए टिकैत के आंसू, धरना स्थल नहीं हुआ खाली

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस पर हुए हंगामें के बाद किसान आंदोलन कमजोर पड़ने लगा था और नेता बैकफुट पर नजर आ रहे थे. लेकिन, गाजीपुर बार्डर पर धरना दे रहे किसान नेता राकेश टिकैत का भावनात्मक बयान फिर से आंदोलन में जान डालते नजर आ रहा है. एक तरफ जहां चर्चा थी कि गुरुवार की रात को गाजीपुर बार्डर खाली करा लिया जाएगा वहीं अब यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों से किसान यहां पहुंचने की तैयारी में हैं.

गाजीपुर बार्डर पर आधीरात तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा. इससे पहले हुई राकेश टिकैत की प्रेस कांफ्रेंस ने ही मामला बदल दिया था. टिकैत ने साफ कहा था कि प्रशासन के कहने पर वो धरना स्थल खाली नहीं करेंगे. इसके साथ ही वो फूट-फूट कर रोते नजर आए और यहां तक कह दिया कि वे आत्महत्या कर लेंगे. यहां पर किसान 28 नवंबर से ही डटे हुए हैं.

पुलिस के तेवर देखते हुए किसानों ने अपना बोरिया-बिस्तर बांधना शुरू कर दिया था. और लग रहा था कि आंदोलन खत्म हो गया. लेकिन, टिकैत के आंसुओं ने किसानों के इरादे बदल दिए. अब पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली की तरफ कूच कर रहे हैं. साथ ही कई स्थानों पर इसे मुद्दे को लेकर पंचायत भी बुलाई गई है. उन्होंने यह भी कहा कि जिसने भी लाल किले पर तिरंगे के अलावा कोई अन्य झंडा फहराया उस पर सुप्रीम कोर्ट की जांच होनी चाहिए.

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस के दिन किसान यूनियनों ने ट्रैकर मार्च निकाला था जो आईटीओ के पास कर उग्र हो गया. कई आंदोलनकारी लाल किले पहुंच गए और उन्होंने वहां पर जमकर हंगामा किया. लाल किले की एक प्राचीर पर निशान साहिब झंडा भी फहरा दिया.

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