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“पाले” का प्रकोप बढ़ा, ये आसान उपाय बचा सकते हैं फसलों को

 “पाले” का प्रकोप बढ़ा, ये आसान उपाय बचा सकते हैं फसलों को

नई दिल्ली: एक तरफ जहां दिल्ली में किसान आंदोलन कर रहे हैं वहीं देश के अलग-अलग हिस्सों में ठंड ने फसलों की हालत बिगाड़ दी है. तापमान लगातार गिर रहा है और शीतलहर बढ़ती जा रही है. दलहनी, तिलहनी सहित कई फसलों को नुकसान हो रहा है. कई स्थानों पर तो फसलों पर बर्फ की हल्की परत भी देखी जा रही है. “पाला” का प्रकोप किसानों पर है लेकिन, कुछ सही कदम उठाकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है.

काफी ऊंचे रेट में आलू के बीज खरीदे थे

उत्तर प्रदेश के किसानों ने बताया है कि उन्होंने इस बार काफी ऊंचे रेट में आलू के बीज खरीदे थे. लेकिन, अब पाले ने आशंका बढ़ा दी है कि फसल कम होगी. इसने किसानों की चिंताएं अभी से बढ़ा दी हैं. गौरतलब है कि इस समय मटर, आलू, चना, मिर्च, गोभी, सरसों, आलू, मेथी जैसी रबी की फसलों की बुवाई हुई है. इनमें से कुछ पर शीतलहर का असर काफी होता है. बारिश और ओले पड़ने की खबरों ने परेशानी और बढ़ा दी है.

15 दिसंबर से 15 जनवरी तक तापमान 4 सेल्सियस कम हो जाता है

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक तापमान 4 सेल्सियस कम हो जाता है. ऐसे में पत्तियों पर बर्फ की हल्की परत जम जाती है जिससे परागण नहीं हो पाता और फसल खराब हो जाती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि पाले के खतरे से बचने के लिए कई उपाय हैं. इनका इस्तेमाल कर इस खतरे को काफी कम किया जा सकता है.

उपाय: (नोट: बिना विशेषज्ञ सलाह के कोई उपाय न करें, पहले सलाह लें)

  1. फसल की हल्की सिंचाई कर दें जिससे मिट्टी का तापमान वातावरण के तापमान से अधिक हो जाता है
  2. थायो यूरिया को आधा ग्राम प्रति लीटर की मात्रा में घोल बनाकर छिड़काव करें
  3. घुलनशील सल्फर 80 प्रतिशत, WP दो ग्राम प्रतिलीटर बनाकर 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें
  4. गंधक का तेजाब 0.001 प्रतिशत की दर से छिड़काव करना भी ऐसे मौसम में काम कर सकता है
  5. खेत के उत्तर-पश्चिम की मेड पर धुआं करें क्योंकि हवा ज्यादातर उधर से ही आती है. इससे पाला का असर काम किया जा सकता है
  6. कुछ फसलों पर प्लास्टिक की पन्नी से ढकना भी काम कर जाता है साथ ही कुछ स्थानों पर घेराव करना होता है

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