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सियासी मैदान में कूदे किसान नेता गुरुनाम सिंह चढूनी

 सियासी मैदान में कूदे किसान नेता गुरुनाम सिंह चढूनी

Gurnam Singh Charuni

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन से चर्चा में आये भारतीय किसान युनियन हरियाणा के प्रमुख नेता गुरुनाम सिंह चढूनी ( Gurunam singh chaduni ) ने आज सियासी मैदान में कूदने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त संघर्ष पार्टी ( Sanyukta sangharsh party ) के नाम से नई पार्टी की घोषणा भी कर दी है। अपनी सियासी योजना के तहत वो पंजाब ( Punjab Mission ) में पार्टी के बैनर तले प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाएंगे। वो खुद पंजाब में चुनाव नहीं लड़ेंगे। खुद हरियाणा से भविष्य में चुनाव लड़ेंगे। अपनी नई पार्टी की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा की राजनीति प्रदूषित हो गई है। इसे बदलने की जरूरत है। नीति निर्माता पूंजीवाद को बढ़ावा देने में लगे हैं। पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियां बनाई जा रही हैं। आम आदमी, गरीबों के लिए कोई कुछ नहीं कर रहा है। इसलिए हमने संयुक्त संघर्ष पार्टी की घोषणा की है। ताकि पूंजीवादी व्यवस्था पर आधारित व्यवस्था में बदलाव ला सकें।

बता दें कि जुलाई 2021 में ही चढूनी पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन पंजाब के किसान उनके इस फैसले से एकमत नहीं थे। चढूनी अपने मिशन पंजाब के तहत फतेहगढ़ साहिब में दौरे के दौरान एक उम्मीदवार की घोषणा भी कर चुके हैं। हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा उनके पंजाब में चुनाव लड़ने के निर्णय से सहमत नहीं था, पर चढूनी अपने निर्णय पर अडिग रहे। उनके इस अड़ियल रवैये की किसान नेताओं ने आलोचना भी की थी। पार्टी प्रत्याशी को पंजाब में लड़वाएंगे चुनाव पंजाब में चुनाव लड़ने की घोषणा के तहत गुरनाम सिंह यह भी कह चुके हैं कि हरियाणा छोड़कर पंजाब नहीं भागेंगे। वो मिशन पंजाब के तहत पंजाब में चुनाव नहीं लडेंगे, बल्कि चुनाव लड़वाएंगे। हरियाणा से संबंध होने के सवा लपर वह कह चुके हैं कि ने पैराशूट नेता नहीं बनेंगे। उनका पुश्तैनी गांव पंजाब में है और वहां पर विधानसभा चुनाव होने वाला है, इसलिए वहीं से चुनावी लड़ाई लड़ेंगे। कुछ लोगों का कहना है कि उनका आम आदमी पार्टी से नजदीकी है।

कौन हैं गुरुनाम सिंह चढूनी?

62 वर्षीय किसान नेता गुरुनाम सिंह चढूनी ( Gurunam singh chaduni ) हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहबाद चरुनी जाटन गांव के रहने वाले हैं। हरियाणा में बीकेयू के करीब आधा दर्जन गुट हैं। गुरनाम सिंह 29 साल से किसानों के बीच सक्रिय हैं। कहा जाता है कि बीकेयू ( चारुनी ) अंबाला, कैथल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जिलों और उसके आसपास के क्षेत्रों में अपना प्रभाव रखते हैं। 2014 में उनकी पत्नी बलविंदर कौर ने हरियाणा की कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से AAP उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उसने कुल मतों का लगभग 32,554 या 2.17% मत प्राप्त किया। 2019 में गुरनाम सिंह ने खुद कुरुक्षेत्र की लाडवा विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उन्हें केवल 1,307 यानि 0.95% वोट मिले।

Source: https://janjwar.com/

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