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थम नही रहा किसान आत्महत्या का सिलसिला, 2019 के मुक़ाबले किसान आत्महत्या के मामले में 4% की बढ़ोत्तरी

 थम नही रहा किसान आत्महत्या का सिलसिला, 2019 के मुक़ाबले किसान आत्महत्या के मामले में 4% की बढ़ोत्तरी

30 नवंबर, 2021 को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में बताया कि 2020 में क़रीब 5,579 भारतीय किसानों ने आत्महत्या की।

आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2020 तक किसान आत्महत्याओं पर रिपोर्ट अनुसार हैं, कृषि क्षेत्र से कुल 10,677 व्यक्ति शामिल है जिसमें 5,579 किसान/किसान और 5,098 कृषि मजदूर है।

तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार को विशेष रूप से मध्य प्रदेश में किसानों द्वारा उर्वरक की अनुपलब्धता के कारण आत्महत्या करने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

4,006 आत्महत्याओं के साथ महाराष्ट्र एक बार फिर लिस्ट में सबसे आगे है. इसके बाद कर्नाटक (2,016), आंध्र प्रदेश (889), मध्य प्रदेश (735) और छत्तीसगढ़ (537) में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने आत्महत्या की है जो कि देश में किसान आत्यमहत्या का ८० % है ।

पश्चिम बंगाल, बिहार, नागालैंड, त्रिपुरा, उत्तराखंड, चंडीगढ़, दिल्ली , लद्दाख, लक्षद्वीप और पुडुचेरी ने एक भी आत्महत्या
की सूचना नही है।

वर्ष 2020 में 2019 की अपेक्षा किसानों (किसान और कृषि मजदूर) की आत्महत्याओं के मामले लगभग 4 फीसदी बढ़े हैं. जबकि बस कृषि मजदूरों की आत्महत्या के मामले 18 फीसदी बढ़े हैं.

2020 में NCRB के अनुसार किसान आत्महत्या देश में कुल आत्महत्या का 7.0% (1,53,052) है ।

2020 के दौरान 5,579 किसान/किसान आत्महत्या में से, कुल 5,335 पुरुष थे और 244 महिलाएं थीं।
वहीं 5,098 खेतिहर मजदूर में से 4,621 पुरुष थे और 477 महिलाएं थीं।

लगातार चार साल गिरावट के बाद कृषि क्षेत्र में आत्महत्या के मामले बढ़े हैं. 2016 में कुल 11,379 किसान और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की थी. 2017 में इसमें गिरावट आई और संख्या 10,655 रह गई. 2018 में 10,349 तो 2019 में इस तरह के आत्महत्या के कुल 10,281 मामले सामने आए थे. 2020 में ऐसे मामलों की संख्या 10,677 रही.

गौरतलब है कि एनसीआरबी ने साल 2017, 2018 और 2019 के आंकड़े एक साथ जारी किए हैं। 2017 और 2018 के डेटा में अत्यधिक देरी हुई थी। किसान आत्महत्याओं पर वर्ष 2016 की फ़ाइनल एनसीआरबी रिपोर्ट नवंबर 2019 में जारी की गई थी। उस अंतिम रिपोर्ट के बाद से, एनसीआरबी ने किसान आत्महत्याओं के कुछ कारणों को समाप्त कर दिया है जिसमें “फसल विफलता” और “ऋण”शामिल हैं।

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