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#बिल_को_जानो: ‘धक्का’ नहीं अब किसानों की ‘धाक’ होगी, खुले बाजार में बेच सकते हैं फसलें

 #बिल_को_जानो: ‘धक्का’ नहीं अब किसानों की ‘धाक’ होगी, खुले बाजार में बेच सकते हैं फसलें

नई दिल्ली: आईए आज किसानों की चर्चा को लेकर पूर्वांचल के गांवों की ओर चलते हैं. बात करते हैं कि हाशिए पर खड़ा किसान किस कदर परेशान है. वह अपनी आवाज नहीं उठा सकता. दिल्ली तो दूर वह अपने जिले के मुख्यालय तक पहुंच पाने में समर्थ नहीं है. ऐसे में मौजूदा कृषि कानून उसके लिए मददगार साबित हो सकता है. लेकिन, शर्त है कि इसे वास्तविक तरीके से ही लागू किया जाए.

मजूबर का नाम किसान:

आज हम बात कर रहे हैं किसान अमर नाथ पांडेय की. अमर, पांच भाईयों में सबसे छोटे हैं. उनके सभी भाई सेना और पुलिस में हैं. खेती से तंग आकर इन्होंने भी खूब तैयारी की थी लेकिन, शायद सफल नहीं हो पाए. इन्होंने खेती से दूर रहने के लिए अलग-अलग नौकरियां भी ट्राई कीं लेकिन वहां भी बात बन नहीं पाई. अब पूर्ण रूप से अमर खेती का ही काम करते हैं.

मेहनत ही तो नहीं रंग लाती:

अमर खूब मेहनत करते हैं और किस्मत खूब अच्छी रही तो कृषि का लागत निकल आती है. मुनाफा उन्होंने कभी नहीं देखा. क्योंकि, फसल में सब्जी हो या चावल या फिर गेहूं वो लेकर जब मंडी पहुंचते हैं तो उन्हें मनमानी का शिकार होना पड़ता है. वो बताते हैं कि इस बार चावल 12 सौ पर बिका जबकि पिछली बार 18 सौ पर बिका था.

धक्के खा-खा कर परेशान:

अमर सबसे पहले एमएसपी का लाभ लेने के लिए एफसीआई के मंडी पहुंचे. यहां जगह की कमी बता कर उन्हें एपीएमसी रवाना कर दिया गया. एपीएमसी में सही बोली लगाने के लिए अलग-अलग व्यापारियों के धक्के खाते रहें. इसके बाद कमीशन एजेंटों को लेकर उन्होंने उम्मीद जताई कि शायद उन्हें कुछ सही रेट मिल जाए. पर ऐसा नहीं हुआ है. इसके साथ अलग-अलग चरण पर पर्ची कटाने और टैक्स देने की जरूरत भी होती है.

नया कानून, नई उम्मीद:

अब नए कानून से यह लाभ होगा कि अमर नाथ फसल बोते वक्त ही एक उचित मूल्य पर कांट्रैक्ट कर सकेंगे. इसके साथ ही वे फ्लैक्सिबल रेट पर भी कांट्रैक्ट हो सकेगा

…. तो यह होंगे लाभ…

  1. निश्चिंत होकर कांट्रैक्ट मूल्य को लेकर अपना जीवन प्लान कर सकेगा
  2. कांट्रैक्ट के दौरान उसे कृषि वैज्ञानिकों से सीधे मुफ्त में सलाह मिलेगी
  3. उसके पास बेहतर औंजार और तकनीक होंगे जो फसल खरीदने वाला बताएगा
  4. किसान के पास अपनी पूंजी होगी और वह पहले से अच्छी जिंदगी जी सकेगा
  5. उसकी जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकेगा और न ही उसके आसपास कोई निर्माण करा सकेगा
  6. किसी भी गड़बड़ी की अवस्था में किसान पर पेनल्टी नहीं लगेगी जबकि खरीददार पर डेढ़गुना दंड का प्रावधान है
  7. उन्नत ढंग से वह पारंपरिक खेती को छोड़ कर ज्यादा एडवांस फसलें उगा सकेगा
  8. उसका मुकाबला अब पड़ोसी किसान से नहीं दुनिया के किसान से होगा
  9. किसान के पास पहले से बहुत ज्यादा विकल्प होगा. लाभ के आधार पर विकल्प उसे चुनना होगा
  10. किसान जिसका फसल की मूल्य में सबसे कम हिस्सा होता था अब वह बड़े हिस्से का मालिक होगा

लेकिन, इसके अलावा पुराने विकल्प भी

बिल में नए प्रावधानों की व्यवस्था की गई है जबकि पुरानी व्यावस्था को छेड़ा नहीं गया है. ऐसे में किसान लोकल व्यापारी, एपीएमसी मंडी और एफसीआई में भी अपनी फसलें बेच सकता है यदि उसने किसी के साथ कांट्रैक्ट न किया हो तो. तो आईए जानते हैं क्या-क्या विकल्प होंगे…

  1. किसान अपनी फसलें लोकल व्यापारी को बेच सकता है
  2. एपीएमसी मंडी में पहले की तरह पर्ची कटा कर फसल दे सकता है
  3. एमएसपी जारी है तो वह एफसीआई में जाकर भी अपनी फसल बेच सकता है
  4. ओपन मार्केट में देश के किसी हिस्से में अपनी फसल ले जाकर बेच सकेगा
  5. ई-कामर्स के जरिए भी फसल को बुक करा सकता है. इसमें प्री-बुकिंग और पोस्ट बुकिंग दोनों हो सकेगी
  6. कार्पोरेट के अलावा व्यक्तिगत तौर पर भी किसी नागरिक से या नागरिकों से समूह से वह कांट्रैक्ट कर सकता है
  7. ऐसे में आम लोग भी सीधे किसान से उचित मूल्य में अनाज खरीद सकेंगे
  8. किसान जितना चाहे फसल अपने दालान में होल्ड कर के रख सकता है अब और धीरे-धीरे बेच सकता है
  9. गोदाम किराए पर लेकर फसल में उसमें रख सकता है और रीटेल में भी खुद ही बेच सकता है
  10. देश के जिस हिस्से में फसल की सही रेट हो वहां जाकर वह बेच सकता है

जमीन पर उतारना होगा कानून वरना…

लेकिन, जाहिर सी बात है कि यह सब तभी संभव हो पाएगा जब कानून को सरकार पूरी तरह से जमीनी स्तर पर लागू करवा सके. क्योंकि, यदि ऐसा नहीं हुआ तो फिर नए तरह की समस्याएं किसानों के पास होंगी और उनकी कमाई पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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