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‘सूरन’ या ‘जिमिकंद’ : खेती लेकर खाने तक फायदे ही फायदे

 ‘सूरन’ या ‘जिमिकंद’ : खेती लेकर खाने तक फायदे ही फायदे

नई दिल्ली: देसी सब्जियों की लिस्ट में ‘सूरन’ या ‘जिमिकंद’ (elephant foot yam) का नाम काफी ऊपर आता है. यह एक पारंपरिक भारतीय सब्जी है. इसका इस्तेमाल तरकारी, अंचार, चिप्स और चोखे के साथ दवाओं में खूब होता है. यही कारण है कि सूरन की बिक्री खूब होती है और इसमें समस्या नहीं आती है. यह काफी समय तक बिना किसी खास इंतजाम के स्टोर कर के रखा जा सकता है.

एक सीजन में एक लाख रुपए की आय:

महज एक बीघे में भी यदि इसकी खेती की जाए तो एक लाख रुपए तक एक सीजन में कमाया जा सकता है. सूरन की खेती में बहुत समय भी नहीं लगता है. फरवरी-मार्च में इसे बोया जा सकता है जबकि सितंबर-अक्टूबर में इसकी खुदाई की जा सकती है. दीपावली पर सूरन खाने का विशेष महत्व होता है. इसलिए इसकी मांग भी काफी बढ़ जाती है.

ओरिजिन को लेकर तथ्य:

पहले तो सूरन का ओरिजिन भारत ही माना जाता था लेकिन सन 2017 में नए वैज्ञानिक तथ्यों के आने के बाद आइलैंड साउथइस्ट एशिया का नाम सामने आया. हालांकि भारत में लंबे समय से इसका इस्तेमाल होता है. यहां तक की भारतीय ग्रंथों और वेदों में भी इसका जिक्र काफी है. इसके औषधीय गुणों के कारण इसका प्रयोग काफी सयम से होता आया है.

नाम भी हैं मजेदार:

वैसे तो सूरन या जिमिकंद देश के हर हिस्से में इस्तेमाल होता है लेकिन इसके नाम बिल्कुल अलग हैं. ऐसे में अगर आपने अपने इलाके का नाम किसी दूसरे स्थान पर ले लिया तो शायद कोई समझ ही नहीं पाएगा कि आप कौन सी सब्जी खाना चाहते हैं. बंगाल में इसे ओल कहते हैं जबकि यूपी और गुजरात में सूरन, छत्तीसगढ़ में जिमिकंद, त्रिपुरा में बाटेमा और दक्षिणी भारत (केरल) में चेना के नाम से जानते हैं.

तो किसान भाइयों के लिए यह काफी लाभदायक फसल हो सकती है. उनके खाने के लिए भी और आय में भी. एक बीघे की फसल से एक से डेढ़ लाख की कमाई हो सकती है.

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