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#बिल_को_जानो: MSP का नाम तो सुना होगा, अब जानिए यह तय कैसे होती है … बस एक क्लिक में

 #बिल_को_जानो: MSP का नाम तो सुना होगा, अब जानिए यह तय कैसे होती है … बस एक क्लिक में

नई दिल्ली: तो इससे पहले हमने एमएसपी के बारे में चर्चा की थी और बताया था एमएसपी होता क्या है और कहां कैसे लागू होता है. देश की कृषि व्यवस्था में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि MSP का बहुत योगदान है. 1966 से ही इसने कृषकों को उत्साहित किया है. यह बात अलग है कि देश भर में 6 प्रतिशत फसलें ही MSP पर बिक पाती हैं. इसके बावजूद ताजा चल रहे आंदोलन में इसे लेकर मांग की जा रही है.

अभी तक असल में यह कानून का स्वरूप नहीं ले पाया है. यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत साल में दो बार तय किया जाता है. एक बार रबी और दूसरी बार खरीफ के मौसम में. कृषि लागत और मूल्य आयोग Commission for Agricultural Costs and Prices (CACP) इसे तय करता है. इसे तय करने के लिए एक विशेष फार्मूला का इस्तेमाल किया जाता है.

स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश पर इसे अमल में लाया जाता है. हालांकि, पूरी तरह से फार्मूला अभी भी इस्तेमाल में नहीं होता है.

विशेष फर्मूला :

ए2 (A2)- इसके तहत किसान की मूल लागत जैसे बीज, रसायन, किसान मजदूर की कीमत और फर्टीलाइजर आदि

ए2+एफएल (A2+FL)– इसमें लागत के अलावा किसान की फैमिली लेबर का अंश भी संज्ञान में रखा जाता है

सी2(C2)– इसमें A2+FL तो होता ही है साथ ही किसान की जो जमीन है उसकी एसेट वैल्यू* को भी संज्ञान लिया जाता है
(*जैसे किसान को उसकी जमीन पर जो रेंट मिल सकता था या उसकी पूंजी पर जो व्याज मिल सकता था, उसे भी जोड़ा जाता है)

इस फसलों पर मिलता है MSP:

7 अनाज: धान, गेहूं, बाजरा, मक्का,ज्वार, रागी और जौ

5 दालें: चना, तुअर, ऊरद, मूंग और मसूर

7 तिलहन: सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम और नाइजर बीज

4 व्यवसायिक फसल: कपास, गन्ना, नारियल/गरी और कच्चा जूट

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