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#बिल_को_जानो: महाराष्ट्र में 16 सालों से चल रही है नए कृषि कानूनों जैसी व्यवस्था, सब चंगा है

 #बिल_को_जानो: महाराष्ट्र में 16 सालों से चल रही है नए कृषि कानूनों जैसी व्यवस्था, सब चंगा है

नई दिल्ली: तीन कृषि बिलों को लेकर काफी गहमा-गहमी चल रही है. सबसे ज्यादा बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या खेती-किसानी का पूरा काम निजी हाथों में चला जाएगा. साथ यह डर भी जताया जा रहा है कि किसानों का इससे शोषण बढ़ जाएगा. पर आपको यह हम बता दें कि जो बिल केंद्र सरकार ले कर आई है ठीक उसी से मिलती-जुलती व्यवस्था महारष्ट्र में पिछले 16 सालों से चल रही है. इसका लाभ किसानों को मिला है और सबसे अहम बात कि वहां एपीएमसी मंडियां भी सुचारू रूप से चल रही हैं.

महाराष्ट्र सरकार की पहल:

महाराष्ट्र में 2005-06 में कांग्रेस की सरकार थी और विलासराव देशमुख उसके मुख्यमंत्री थे. इसी दौरान उन्होंने निजी क्षेत्र के लिए दरवाजे खोले थे. इसके तहत महाराष्ट्र में प्राइवेट मंडी और कलेक्शन सेंटर की व्यवस्था की गई थी. यह एपीएमसी मंडियों के अलावा किसानों को नए विकल्प देने के लिए हुई थी. ठीक वैसा ही जैसा केंद्र के नए कानून में प्रावधान किया गया है.

यह होता है प्राइवेट मार्केट:

जैसा की नाम है इसे प्राइवेट मार्केट कहा ही इसलिए जाता है क्योंकि इसे निजी संस्थाएं चलाती हैं. इसे बनाने के लिए डायरेक्टर ऑफ मार्केटिंग की ओर से लाइसेंस जारी किया जाता है. इसे लोग अकेले या समूह में मिलकर लाइसंस ले सकते हैं. हालांकि, निजी बाजार बनाने के लिए कुछ शर्ते भी पूरी करनी होती हैं. इसमें व्यक्ति या समूह के पास पांच एकड़ की जमीन होनी चारिए, ऑक्शन हॉल होना चाहिए, वेटिंग हॉल होना और मोटरेबल सड़कों के साथ शेड्स भी होने चाहिए. महाराष्ट्र में फिलहाल 18 निजी मार्केट काम कर रहे हैं.

कलेक्शन सेंटर :

इसका कांसेप्ट थोड़ा अलग है. इसे ‘फार्म गेट’ भी बोला जाता है. तो असल में यह वह स्थान होता है जहां एक जैसी फसल लोग दूर-दूर से लाते हैं और बड़े कार्पोरेट हाउस उन्हें खरीद लेते हैं. इस मामले में पहले से भी कोई करार कर सकता है और मौके पर आकर भी सौदा तय कर सकता है. बिग बास्केट या ऐसी ही कंपनियां महाराष्ट्र में इसका उपयोग खूब कर रही हैं. यही कारण है कि राज्य में 1100 कलेक्शन सेंटर बने हुए हैं. इसके लिए संस्था या व्यक्ति को डायरेक्ट मार्केट लाइसेंस लेना होता है. इसके लिए 5 लाख बैंक गारंटी देनी होती है.

एक नजर में वैकल्पिक मार्केट:

दोनों तरह के बाजार के लिए लाइसेंस लेना होता है
दोनों लाइसेंस साल में एक बार रीन्यू होता है
गड़बड़ी पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द होता है
प्राइवेट मार्केट पर MSP से नीचे नहीं खरीद सकते
APMC को 1.05% का सेस देना होता है
(*लेकिन नए कानून में नहीं देना पड़ेगा)
अलग उत्पादों के लिए भी हो सकते हैं औऱ एक तरह के भी

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