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काबुली चने के फायदे खाने में ही नहीं उगाने में भी है, जानिए सब एक क्लिक में

 काबुली चने के फायदे खाने में ही नहीं उगाने में भी है, जानिए सब एक क्लिक में

नई दिल्ली: बात चाहे छोले चावल की हो या फिर छोला-भटूरे की…छोला आम भारतीय किचन में एक जरूरी खाने का सामान है. इन छोलों में ‘काबुली चना’ मुख्य होता है. लाल चने से यह थोड़ा अलग होता है. तो आइए बात करते हैं काबुली चने या सफेद चने (Chickpeas) की खेती की.

खास अवसरों की शान है सफेद चना

चना भारत में 3000 BC से है. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में इसके साक्ष्य और भी पुराने मिले हैं. बहरहाल हमारे घरों में खास अवसरों पर सफेद यानी काबुली चने का महत्व अलग ही होता है. छोले बनाना इसका सबसे महत्वपूर्ण व्यंजन है. आजकल ‘हमस’ भी खाया जा रहा है और चना मसाला तो खास है ही.

खेती की जानकारी

काबुली चना की खेती देसी चने की के समान ही होती है. कृषि की भाषा में इसे काबुली, डॉलर और छोला चना कहा जाता है. काबुली चने का पौधा देसी लाल चने से बड़ा होता है. इसके पौधे पर फलियों देरी से बनती है. इसके पौधे देसी चने से ज्यादा वक्त बाद पकते हैं. इसका आकार बड़ा होता है और रंग सफेद.

ठंड चाहिए खेती के लिए

इसकी खेती ठंड के दिनों में ही होती है क्योंकि इसके पौधे गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं. साथ ही इसे खास सिंचाई की भी जरूरत होती है. काबुली चने की मांग पिछले दिनों में काफी बढ़ गई है. हल्की दोमट मिट्टी में इसकी फसल अच्छी होती है.

कई प्रकार के उपलब्ध हैं

काबुली चने की कई किस्म बाजार में उपलब्ध है. इसके साथ ही इसके उन्नत बीज भी मौजूद हैं. श्वेता, मेक्सीकन बोल्ड, हरियाणा काबुली नं 1, चमत्कार, काक 2, एच.के. नं. 2, जे.जी.के. 1, जे.जी.के. 2, एसआर 10, पूसा 1003, शुभ्रा आदि इसकी किस्मे हैं.
प्रति हेक्टेयर औसतन 20 क्विंटल का उत्पादन होता है. बाजार में प्रति क्विंटल 6 हजार के रेट अभी मिल रहा है.

बहुत फायदे का सौदा है

सफेद चने में पोषक तत्व काफी मात्रा में पाया जाता है. इसमें कार्ब्स, फाइबर, प्रोटीन, आयरन, फॉस्फोरस, कॉपर और मैग्निज मिलता है. कैलोरी इसमें बहुत कम होती है. भूख पर नियंत्रण के लिए यह एक खास भोजन है, जो जायके में भी जबरदस्त है और स्वास्थ्य में भी. वजन कम करने वालों के लिए यह सूपर फूड की तरह काम करता है.

नाम इसके भी हैं कई

तो जैसा कि मैंने पहेल ही कहा है कि इसे सफेद चना या काबुली चना कहते हैं. लेकिन, आपको बता दूं कि इसे बंगाल ग्राम, गारबंजो बीन्स और मिस्र के मटर के रूप में भी जाना जाता है. ये देसी या लाल चने से आकार में बड़े और थोड़े हल्के रंग के होते हैं. इसे बनाना भी आसान होता है.

खाने के कई तरीके

छोले और चना मसाला तो हमारे घरों में बनता ही है लेकिन इसके साथ सलाद भी काफी बेहतर होता है. रात भर भिगोने के बाद इसे उबाल दें. इसके बाद इसमें नमक आदि मिलाने के साथ खीरा, टमाटर और प्याज डालकर खाएं. यकीन मानिए स्वाद में तो यह मजा देगा ही लेकिन सेहत के लिए भी परफेक्ट होगा.

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