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करेला का जायका “मीठा”, खूब हो रही कमाई

 करेला का जायका “मीठा”, खूब हो रही कमाई

नई दिल्ली: अगर आप भी खेती से कम लागत में ज्यादा कमाई करने की सोच रहे हैं तो आपके लिए करेले की खेती (Bitter Gourd Farming) अच्छा विकल्प है. करेला अपने पौष्टिक और औषधीय गुणों के कारण काफा लोकप्रिय सब्जी और मधुमेह के रोगियों के लिए के लिए बहुत फायदेमंद है.

कितना है खर्च और कितनी होती है कमाई
करेला (Bitter Gourd) की खेती में प्रति एकड़ 40 हजार रुपए का खर्च आता है, मार्केट अच्छा रहा तो करीब डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है. फसल अच्छा होने पर एक बीघा में 50 क्विंट के करीब करेला की उपज होती और यह 20 से 30 रुपये प्रति किलो की रेट से बिक जाता है.

कैसे होती है करेला की बुआई
करेला की खेती के लिए सबसे पहले गोबर और खाद डालकर खेत तैयार किया जाता है और फिर 4-5 करेले के बीच 2-3 सेमी गहराई में लगाया जाता है. इन बीजों को एक कतार में 1-5 मीटर के बीच बुआई की जाती है. पौधे उगने के बाद खेतों में मचान तैयार किया जा रहा है और इसके ऊपर जाल बनाकर करेले के बेल को जमीन से मचान तक पहुंचाया जाता है. मचान विधि से खेती करने से 90 प्रतिशत तक फसल खराब होने से बच सकता है.

खाद, उर्वरक और पौधों की सिंचाई
पौधे जब थोड़े बड़े हो जाते हैं तब इनके बीच क्यारी (मेड़) बना दिए जाते हैं, जिससे सिंचाई आसान हो. साधारण रूप से 8-10 दिनों में करेले के पौधों की सिंचाई की जाती है. अगर खाद और उर्वरक की बात करें तो प्रति हेक्टेयर में 70 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम सल्फर और 50 किलोग्राम पोटाश की जरूरत होती है. नाइट्रोजन, सल्फर और पोटाश की आधी मात्रा बुआई के समय दिया जाना चाहिए. जबकि बाकी मात्रा बुआई से 30-40 दिन के बाद देना चाहिए.

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