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मखाने ने बदली किसानों की किस्मत, लाखों में कमाई

 मखाने ने बदली किसानों की किस्मत, लाखों में कमाई

नई दिल्ली: मखाना (Makhana) एक सुपर फूड की कैटेगरी में आता है और समय के साथ इसकी डिमांड भी बढ़ती जा रही है. मार्केट में मांग बढ़ने के साथ ही मखाना किसानों के लिए वरदान साबित रहा है और कई किसान अब मखाना की खेती (Makhana Farming) कर लाखों की कमाई कर रहे हैं. इस काम में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं और तालाब और जलभराव की वजह से बेकार पड़ी जमीनों को लेकर मखाने की खेती कर रही हैं. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि मखाने की खेती कैसे करें और फसल तैयार होने के बाद इसको किस तरह बेच सकते हैं.

कहां होती है सबसे ज्यादा खेती
देशभर में करीब 20 हजार हेक्टेयर जमीन पर मखाना की खेती की जाती है. मखाना का सबसे ज्यादा उत्पादन बिहार में होता है और मिथिलांचल से 80 फीसदी मखाने का उत्पादन होता है. हालांकि अब इस सुपर फूड की खेती पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर, मणीपुर, मध्यप्रदेश, राजस्थान और नेपाल के तराई वाले इलाकों के किसान भी करने लगे हैं.

कैसे खेत की होगी जरूरत
मखाने की खेती की सबसे खास बात यह है कि इसमें लागत काफी कम है और इसके लिए तालाब या ऐसे खेत की जरूरत होती हैं, जहां पानी हो. हालांकि इसके लिए ज्यादा पानी की जरूरत  नहीं है, खेत में बस एक फीट के करीब पानी काफी है. जिन इलाकों में अच्छी बारिश होती है और पानी के संसाधन मौजूद हैं, वहां इसकी खेती खूब फलती-फूलती है. आमतौर पर मखाने की खेती दिसंबर से जुलाई के बीच की जाती है, लेकिन कृषि में नई तकनीक और उन्नत बीज आने के बाद कई किसान साल में मखाने की दो फसल भी उगा रहे हैं. यह नकदी फसल है और करीब पांच महीने में तैयार हो जाती है. अगर आपके पास भी कोई बेकार जमीन है, जिसमें सालभर पानी जमा रहता है तो आप भी मखाना उगा सकते हैं.

कब होती है बुआई और कब होती है कटाई
मखाने की बुआई दिसंबर से जनवरी के बीच में की जाती है. मखाने की बुआई से पहले खेत या तालाब की सफाई की जाती है और जलकुंभी समेत अन्य जलीय घास को निकाल दिया जाता है. इसके बाद  एक हेक्टेयर तालाब में 80 किलो बीज बोए जाते हैं. इसके बाद पानी के ऊपर कटीले पत्तों से भर जाते और फिर इसमें नीले, जामुनी, लाल और गुलाबी रंग के फूल खिलने लगते हैं, जिन्हें नीलकमल कहा जाता है. फूल दो-चार दिन में पानी में चले जाते हैं और पौधों में बीज बनने लगते हैं. बीज बनने के बाद मखाने कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. हर पौधे में 10 से 20 फल लगते हैं और हर फल में तकरीबन 20 बीज होते हैं. कुछ दिन तक फल पानी की सतह पर तैरते रहते हैं और फिर तालाब की तलहटी में बैठ जाते हैं. फल कांटेदार होते हैं और कांटों के गलने में एक महीने का समय लगता है. इसके बाद किसान पानी की निचली सतह से इन्हें इकट्ठा कर बाहर निकालते हैं. इसके बाद बीजों को रगड़ कर इनके छिलके को अलग किया जाता और फिर इन्हें भूना जाता है.

कितनी होती है मखाने से कमाई
एक्सपर्ट का मानना है कि एक हेक्टेयर में मखाने की खेती कर 28 से 30 क्विंटल तक पैदावार उपजाई जा सकती है. आमतौर पर एक एकड़ 10 से 12 क्विंटल मखाने का उत्पादन होता है और प्रति एकड़ की खेती में 20 से 25 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि इसका मुनाफा 60 से 80 हजार रुपये तक हो सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार मखाने के निर्यात से देश को हर साल करीब 22 से 25 करोड़ की विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है.

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