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गर्मी में किसी ‘संजीवनी बूटी’ से कम नहीं है पुदीना, आप भी उगाईए

 गर्मी में किसी ‘संजीवनी बूटी’ से कम नहीं है पुदीना, आप भी उगाईए

नई दिल्ली: आज में जिस चीज की बात करने जा रहा हूं उसे गर्मी की ‘संजीवनी बूटी’ के नाम से भी जाना जाता है. गर्मी ही नहीं बरसात में भी यह गजब काम की होती है. मैं बात करने जा रहा हूं पुदीने की. इसकी मांग बहुत होती है और इसकी खेती से अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है.

एक बार बुआई और कई बार कटाई:

पुदीने की खासियत यह है कि इसे एक बार ही लगाना होता है और फिर इसकी कटाई आप तीन से चार बार तक कर सकते हैं. अच्छी फसल पर रेट भी ठीक मिल जाते हैं. स्वाद, सौंदर्य और सुंगंध का यह एक ऐसा ठिकाना है जो दुनियाभर में बहुत ही कम पाया जाता है. इसकी उम्र भी खासी लंबी होती है और नमी वाले स्थानों पर आप इसे हर मौसम में उगा सकते हैं. जितनी गर्मी बढ़ती है उतना ही इसका असर बढ़ता है.

खेती के लिए उचित मिट्टी एवं जलवायु

हर तरह की मिट्टी में आप पुदीने की खेती कर सकते हैं
जीवांश युक्त बलुई दोमट मिट्टी पुदीने की खेती के लिए सर्वोत्तम है
मिट्टी का पी.एच स्तर 6.0 से 7.5 हो तो फसल अच्छी होती है

रोपाई का समय

अत्यधिक ठंड वाले महीनों को छोड़ पूरे साल इसकी खेती है
फरवरी-मार्च का महीना पौधों को लगाने के लिए बेहतर है
रबी फसलों की कटाई के बाद जायद के रूप में इसकी खेती अच्छी रहेगी

सिंचाई कब, कैसे करें?

पुदीना को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है.
मिट्टी में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए.
गर्मी के मौसम में 6 से 8 दिनों के अंतराल पर सिंचाई

कई प्रकार के होते हैं:

इसकी करीब 30 जातियां और 500 से भी ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं. इसके दुनियाभर में उगाया और खाया जाता है. असल में यह मेंथा वंश का एक पौधा है. पिपरमिंट और पुदीना एक ही जाति के होते हैं. इसकी अलग-अलग प्रजातियां यूरोप, अमेरिका, एशिया, अफ्रीका और आस्ट्रेलिया में उगाई जाती है.

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