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क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP, जानें एक क्लिक में

 क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP, जानें एक क्लिक में

नई दिल्ली: कृषि कानूनों (Agriculture Law) के विरोध में किसानों का प्रदर्शन (Farmers Law) लगातार जारी है. किसानों को सबसे बड़ी चिंता उपज पर मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर है. किसानों को डर है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य धीरे-धीरे खत्म कर सकती है. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है?

क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य?
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक गारंटेड मूल्य है, जो किसानों को उनकी फसल पर मिलता है. भले ही बाजार में फसल की कीमत कम ही क्यों ना हो. इसके पीछे उद्देश्य है कि बाजार में फसलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का किसानों पर असर न पड़े और उन्हें उन्हें न्यूनतम कीमत मिलती रहे. वर्तमान समय में सरकार 26 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है, जिसमें 7 अनाज (चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी आदि), 5 दलहन, 8 तिलहन के अलावा अन्य फसलें शामिल हैं.

कब हुई थी इसकी शुरुआत
50 और 60 के दशक में अच्छी कीमत नहीं मिलने की वजह से किसान परेशान थे, क्योंकि फसल का उत्पादन ज्यादा होने पर किसानों की लागत तक नहीं निकल पाती थी. इसके बात साल 1964 में एलके झा के नेतृत्व में फूड-ग्रेन्स प्राइज कमेटी बनाई गई थी और इस कमेटी के सुझावों पर साल 1965 में भारतीय खाद्य निगम (FCI) की स्थापना हुई और एग्रीकल्चरल प्राइजेस कमीशन (APC) बना. इन दोनों संस्थाओं का काम देश में खाद्य सुरक्षा का प्रशासन करने में मदद करना है. एफसीआई वह एजेंसी है जो एमएसपी पर अनाज खरीदती है, उसे अपने गोदामों में स्टोर करती है और पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के जरिे जनता तक अनाज को रियायती दरों पर पहुंचाती है.

क्या है एमएसपी पर किसानों की मांग
किसानों की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर उन्हें सिर्फ आश्वासन ना दिया जाए, बल्कि इसको एक विधेयक में शामिल किया जाए कि एमएसपी खत्म नहीं किया जाएगा. किसानों का कहना है कि इसके लिखित में होने के बाद अगर सरकार एमएसपी खत्म करती है तो वे कोर्ट भी जा सकते हैं.

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