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70-75 दिन में तैयार होगा बाजरा! सूखे वाले इलाकों के लिए खास तैयारी

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ABP News
October 10, 2026•3 min read
70-75 दिन में तैयार होगा बाजरा! सूखे वाले इलाकों के लिए खास तैयारी

SKRAU Bajra Varieties: राजस्थान के बीकानेर में खेती करने वाले किसानों के सामने पानी की कमी एक बड़ी परेशानी है. ऐसे में ऐसी फसलें और किस्में जरूरी हो जाती हैं, जो कम पानी वाले इलाकों में भी खेती के काम आ सकें. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में बाजरे की दो संकर किस्में तैयार की गई हैं. इनके नाम बीएचपी 1202 और बीएचपी 1602 हैं.

इन किस्मों को विकसित करने का मकसद कम पानी वाले इलाकों में बाजरे की खेती को बढ़ावा देना है. हालांकि, किसान इनके बीज खरीदने से पहले यह जरूर पता कर लें कि बीज उपलब्ध हैं या नहीं और उनके इलाके में इन किस्मों को उगाने की सिफारिश की गई है या नहीं. क्योंकि किसी किस्म का तैयार होना और किसानों के लिए उसके बीज बाजार में मिलना अलग-अलग बातें हैं.

70 से 75 दिन में तैयार हो जाए फसल, इस पर जोर

बाजरे की फसल को तैयार होने में लगने वाला समय किसानों के लिए काफी अहम होता है. कुछ किस्में करीब 80 से 90 दिन या इससे ज्यादा समय ले सकती हैं. अगर बारिश बीच में रुक जाए, तो लंबी अवधि वाली फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ता है. इसी वजह से वैज्ञानिक ऐसी किस्में विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जो करीब 70 से 75 दिन में पककर तैयार हो जाएं. कम समय में तैयार होने वाली फसल मिट्टी में मौजूद नमी का इस्तेमाल जल्दी कर सकती है. हालांकि, जल्दी पकने वाली किस्म से हर हाल में ज्यादा पैदावार मिलेगी, ऐसा जरूरी नहीं है. उत्पादन पर मौसम, मिट्टी, बीज और खेती के तरीके का भी असर पड़ता है.

आरएचबी 233 और आरएचबी 234 भी हैं विकल्प

बाजरे की उन्नत किस्मों में आरएचबी 233 और आरएचबी 234 का भी नाम आता है. इन्हें राजस्थान के श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर से जुड़े कृषि अनुसंधान केंद्र में विकसित किया गया है. इन किस्मों की खास बात इनमें आयरन और जिंक की अच्छी मात्रा होना है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपलब्ध रिकॉर्ड में आरएचबी 233 के पकने का समय करीब 80 दिन और इसकी अनुकूलता राजस्थान समेत कई राज्यों के लिए बताई गई है.

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अपने खेत और पानी के हिसाब से चुनें बीज

किसान बाजरे की किस्म चुनते समय सिर्फ पैदावार का दावा न देखें. अगर खेत में सिंचाई की सुविधा है, तो अपने क्षेत्र के लिए सुझाई गई हाइब्रिड किस्मों पर विचार किया जा सकता है. वहीं, कम बारिश वाले इलाकों में ऐसी किस्म चुनना बेहतर हो सकता है, जो वहां के मौसम और मिट्टी के अनुकूल हो.

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिकारी डॉ. एन.के. शर्मा ने भी किसानों को खेत और पानी की उपलब्धता के हिसाब से किस्म चुनने की सलाह दी है. किसान बीज खरीदने से पहले नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लें, ताकि सही किस्म चुनकर फसल का जोखिम कम किया जा सके.

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