Animal Insurance Scheme: गाय-भैंस पालकर दूध बेचने वाले किसानों के लिए पशु की मौत काफी बड़ा नुकसान बन जाती है. पशु खरीदने से लेकर उसके चारे और देखभाल पर काफी पैसा खर्च होता है. ऐसे में अगर बीमारी, हादसे या प्राकृतिक आपदा में पशु की जान चली जाए, तो पशुपालक के लिए दोबारा काम शुरू करना मुश्किल हो सकता है.
इसी परेशानी को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना शुरू की है. इसके तहत पशुओं का बीमा कराने पर प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सरकार देगी और पशुपालक को सिर्फ 15 प्रतिशत पैसा अपनी जेब से देना होगा.
10 लाख पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य
इस योजना के तहत प्रदेश में 10 लाख पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर, घोड़े, ऊंट और दूसरे पालतू पशुओं को शामिल करने की बात कही गई है. बीमित पशु की बीमारी, महामारी, प्राकृतिक आपदा या किसी अचानक हुए हादसे में मौत होने पर तय नियमों के मुताबिक आर्थिक मदद मिल सकती है.
बीमा के प्रीमियम का 85 फीसदी देगी सरकार
योजना की खास बात यह है कि बीमा कराने के लिए पशुपालक को पूरा प्रीमियम नहीं देना होगा. इसका 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार उठाएगी, जबकि पशुपालक को केवल 15 प्रतिशत रकम देनी होगी. इसमें राज्य सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान और 35 प्रतिशत अतिरिक्त सरकारी सहायता का प्रावधान बताया गया है. इस योजना के लिए उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इससे पशुपालकों के लिए बीमा कराना आसान हो सकता है. हालांकि, बीमा की रकम और पशु के हिसाब से लगने वाले प्रीमियम की जानकारी आधिकारिक नियमों से जरूर जांच लें.
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ऑनलाइन आवेदन और UPI से भुगतान
योजना में आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है. आवेदन के दौरान पशु का आधार टैग और उसकी तस्वीर अपलोड करनी होगी. इसके बाद तय प्रक्रिया के अनुसार UPI या QR कोड से प्रीमियम जमा किया जा सकेगा.
आवेदन के लिए आधार कार्ड, उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और आधार से जुड़े बैंक खाते का विवरण मांगा जा सकता है. इससे पशुपालकों को आवेदन के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है.
पशु की मौत पर कैसे मिलेगा बीमा?
अगर बीमित पशु की मौत हो जाती है, तो पशुपालक को तय प्रक्रिया के मुताबिक 24 घंटे के भीतर संबंधित एजेंसी या बीमा कंपनी को सूचना देनी होगी. इसके बाद जरूरी दस्तावेजों और दावे की जांच होगी. दावा मंजूर होने पर एक महीने के भीतर बीमा राशि सीधे बैंक खाते में भेजने का प्रावधान बताया गया है. वहीं, हादसे में पशु के स्थायी रूप से विकलांग होने पर निर्धारित शर्तों के तहत बीमित रकम का 75 प्रतिशत तक मिल सकता है. ध्यान रखें कि भुगतान बीमा पॉलिसी की शर्तों और दावे की मंजूरी पर निर्भर करेगा.
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