Nepal Cannabis Cultivation: नेपाल में गांजे का नाम आते ही अब तक कानून और पाबंदी की बात होती थी. लेकिन अब करीब 50 साल बाद इस मुद्दे पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को गांजे की नियंत्रित खेती और कारोबार के लिए जरूरी नियम बनाने का आदेश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब कोई भी किसान अपनी मर्जी से गांजे की खेती कर सकेगा. इसके लिए लाइसेंस और सरकारी निगरानी जरूरी होगी.
50 साल पहले क्यों लगी थी गांजे की खेती पर रोक?
नेपाल में पहले गांजे की खेती, बिक्री और इस्तेमाल पर ऐसी पाबंदी नहीं थी. 1960 और 1970 के दशक में यहां गांजा और चरस काफी चर्चित थे. उस समय बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी नेपाल आते थे. बाद में दुनिया के कई देशों में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज हुआ. इसी दौरान नेपाल पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त नियम अपनाने का दबाव बढ़ा.
इसके बाद साल 1976 में नेपाल ने नारकोटिक ड्रग्स कंट्रोल एक्ट लागू किया. इस कानून के तहत गांजे की खेती, बिक्री, खरीद और इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई. हालांकि, कानून में औषधीय और वैज्ञानिक कामों के लिए कुछ शर्तों के साथ अनुमति देने का प्रावधान मौजूद था, लेकिन इसके लिए जरूरी नियम लंबे समय तक नहीं बनाए गए.
अब क्यों बदला मामला?
नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक कामों के लिए गांजे की नियंत्रित खेती और उत्पादन का रास्ता तैयार करने का आदेश दिया है. अदालत ने सरकार को जरूरी नियम, लाइसेंस और निगरानी व्यवस्था बनाने के लिए तीन महीने का समय दिया है.
इसका मकसद यह है कि गांजे का इस्तेमाल दवाइयां बनाने, वैज्ञानिक रिसर्च और उद्योगों में कच्चे माल के तौर पर किया जा सके. हालांकि, मनोरंजन के लिए गांजे के इस्तेमाल को अदालत ने मंजूरी नहीं दी है. यानी बिना लाइसेंस खेती करना या नशीले इस्तेमाल के लिए इसकी बिक्री करना अभी भी गैरकानूनी है.
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गांजे की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?
गांजे के औद्योगिक रूप यानी कम नशीले तत्व वाले भांग के रेशे से कपड़े, रस्सियां, कागज और दूसरी चीजें बनाई जा सकती हैं. इसके बीज से तेल और पौधे से जैव ईंधन तैयार करने की भी संभावना है.
साल 2025 में आई एक रिसर्च के मुताबिक, नेपाल में एक हेक्टेयर जमीन पर औद्योगिक भांग की खेती करने में करीब 3,177 डॉलर खर्च हो सकते हैं. इससे लगभग 10,450 डॉलर की कमाई होने का अनुमान है. यानी खेती पर हुआ खर्च निकालने के बाद करीब 7,273 डॉलर बच सकते हैं. हालांकि, यह सिर्फ रिसर्च में लगाया गया अनुमान है, पक्की कमाई नहीं. असल मुनाफा फसल की पैदावार, बाजार में मिलने वाली कीमत और सरकार के नियमों पर निर्भर करेगा.
किसानों के लिए क्या बदल सकता है?
अगर सरकार लाइसेंस और खेती से जुड़े नियम तैयार कर देती है, तो किसानों को नई फसल और कमाई का विकल्प मिल सकता है. इससे दवाइयां और औद्योगिक सामान बनाने वाली कंपनियों को भी कच्चा माल मिल सकेगा. लेकिन इसके लिए खरीद-बिक्री की व्यवस्था, सही बाजार और किसानों को प्रशिक्षण देना जरूरी होगा. फिलहाल किसानों को खेती शुरू करने से पहले सरकारी नियमों का इंतजार करना होगा.
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