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Dharmkanta Business Cost: गांव में धर्मकांटा लगाना, जानें इसमें कितना आएगा खर्चा और कमाई?

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ABP News
November 3, 2026•3 min read
Dharmkanta Business Cost: गांव में धर्मकांटा लगाना, जानें इसमें कितना आएगा खर्चा और कमाई?

Dharmkanta Business Cost: ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और व्यापार से जुड़े कई ऐसे बिजनेस हैं, जो हर महीने एक बेहतरीन कमाई का जरिया बनते हैं. इन्हीं में से एक बेहद मुनाफेदार बिजनेस है-धर्मकांटा लगाना. गांव या कस्बों के आसपास जहां अनाज मंडियां, चीनी मिलें, क्रशर या बड़े हाईवे होते हैं, वहां गाड़ियों का वजन करने के लिए धर्मकांटे की भारी मांग रहती है. ग्रामीण इलाकों में फसलों की कटाई के सीजन में धान, गेहूं, गन्ना और सरसों जैसी फसलों से लदी ट्रॉलियों और ट्रकों का वजन करने के लिए किसान और व्यापारी बड़े पैमाने पर धर्मकांटे का इस्तेमाल करते हैं. यदि आप भी ग्रामीण क्षेत्र में एक ठोस और लंबे समय तक चलने वाला बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो धर्मकांटा एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है.

धर्मकांटा लगाने में कितना आता है कुल खर्च?

एक नया और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटा लगाने का कुल खर्च लगभग 7 लाख रुपये से लेकर 13 लाख रुपये के बीच आता है. यह खर्च पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस क्षमता का कांटा लगवा रहे हैं और उसकी बनावट कैसी है. ग्रामीण क्षेत्रों में आमतौर पर 40 टन, 60 टन, 80 टन या 100 टन क्षमता के इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटों का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है.

पहला खर्च इलेक्ट्रॉनिक वेइंग स्केल, लोड सेल, इंडिकेटर और सॉफ्टवेयर का होता है, जिसकी कीमत क्षमता के आधार पर करीब 3 लाख से 5.5 लाख रुपये तक होती है. दूसरा बड़ा खर्च सिविल कंस्ट्रक्शन का होता है, जिसमें प्लेटफॉर्म के नीचे मजबूत फाउंडेशन और ऑफिस रूम का निर्माण शामिल है, जिसमें लगभग 2.5 लाख से 4 लाख रुपये का खर्च आता है. तीसरा खर्च सरकारी लाइसेंस, स्टांपिंग फीस, बिजली कनेक्शन और कंप्यूटर-प्रिंटर जैसी एक्सेसरीज का होता है, जिसके लिए करीब 1 लाख से 1.5 लाख रुपये की आवश्यकता होती है.

सरकारी नियम और आवश्यक लाइसेंस

धर्मकांटा का बिजनेस पूरी तरह से सरकारी नियमों के दायरे में आता है, इसलिए बिना सही कागजी कार्रवाई के इसे शुरू नहीं किया जा सकता. इसके लिए सबसे पहले आपको राज्य सरकार के विधिक मापविज्ञान विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना होता है.

इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन से एनओसी, भूमि के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति और एक कमर्शियल बिजली कनेक्शन की जरूरत होती है. धर्मकांटा स्थापित होने के बाद सरकारी इंस्पेक्टर द्वारा इसका सत्यापन किया जाता है. कानून के अनुसार, हर साल या तय समय सीमा के भीतर इस कांटे की दोबारा री-वेरिफिकेशन और स्टांपिंग कराना अनिवार्य होता है, ताकि वजन की सटीकता बनी रहे.

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कमाई और मुनाफे का पूरा गणित

धर्मकांटे से होने वाली कमाई पूरी तरह से उसकी लोकेशन और वहां से गुजरने वाले वाहनों की संख्या पर टिकी होती है. ग्रामीण इलाकों और हाईवे पर गाड़ियों के वजन की फीस तय होती है. आमतौर पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली का वजन करने के लिए 50 से 100 रुपये और बड़े ट्रकों के लिए 150 से 350 रुपये प्रति चक्कर चार्ज किया जाता है.

यदि आपका धर्मकांटा किसी व्यस्त सड़क या मंडी के पास है और रोजाना औसतन 40 से 50 गाड़ियां भी वजन के लिए आती हैं, तो रोज की ग्रॉस कमाई करीब 5,000 से 8,000 रुपये तक हो सकती है. इस हिसाब से हर महीने 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से की जा सकती है. इसमें से अगर बिजली का बिल, एक ऑपरेटर की सैलरी और सालाना मेंटेनेंस का खर्च निकाल दिया जाए, तो भी हर महीने 1 लाख से 1.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है. फसलों के सीजन के दौरान यह कमाई दोगुनी तक बढ़ जाती है.

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