Green Chilli Farming Tips: किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं, जिनकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. हरी मिर्च भी ऐसी ही एक फसल है, जिसका इस्तेमाल लगभग हर भारतीय रसोई में होता है. सब्जी, चटनी, अचार से लेकर कई तरह की खाने की चीजों में हरी मिर्च की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग बनी रहती है. ऐसे में अगर किसान सही मौसम, अच्छी किस्म और वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें तो इससे अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं.
सर्दियों का मौसम हरी मिर्च की खेती के लिए बेहतरीन होता है. ऐसे में अगर आप भी कम जमीन में बेहतर कमाई का विकल्प तलाश रहे हैं तो हरी मिर्च की खेती आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकती है. सही देखभाल कर आप इसे आसानी से अपने खेत में उगा सकते हैं.
सही मिट्टी और खेत का चुनाव जरूरी
हरी मिर्च की अच्छी पैदावार के लिए ऐसी जमीन का चुनाव करना चाहिए, जहां पानी जमा न होता हो. इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है. वहीं खेत में पर्याप्त जैविक तत्व होने से पौधों का विकास बेहतर होता है. ऐसे में बुवाई से पहले खेत की दो से तीन बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें. इसके बाद अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं. खेत में जल निकासी की व्यवस्था जरूर रखें, क्योंकि पानी जमा होने से पौधों की जड़ों में बीमारी लग सकती है.
ऐसे करे सर्दियों में बुवाई
मिर्च की रबी फसल के लिए अक्टूबर-नवंबर का समय बुवाई के लिए महत्वपूर्ण होता है. इसके लिए आप पहले नर्सरी तैयार कर सकते हैं और फिर तैयार पौधों को खेत में लगा सकते हैं. नर्सरी में बीजों की बुवाई लाइन में करें. पौधों को शुरुआती अवस्था में पर्याप्त नमी और उचित देखभाल की जरूरत होती है. ऐसे में उनकी नियमित देखभाल करें. आमतौर पर 30-35 दिन की स्वस्थ पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है.
इन उन्नत किस्मों का कर सकते हैं चुनाव
हरी मिर्च की खेती में किस्म का चुनाव काफी महत्वपूर्ण होता है. अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी के अनुसार किस्मों का चुनाव करना बेहतर होता है. आप काशी अनमोल, काशी गरिमा और काशी आभा जैसी बेहतरीन किस्मों का चुनाव कर सकते हैं. इसके अलावा अरका तन्वी, अरका यशस्वी और नागवी गिड्डागाय जैसी किस्में भी बेहतर होती हैं. ध्यान रहे कि किस्में अच्छी होने के बावजूद भी हमेशा स्वस्थ बीजों का ही चुनाव करें.
यह भी पढ़ें: Onion Mandi Rate: लाल प्याज को अलवर मंडी में खाली करें किसान भाई, लगातार बढ़ रही डिमांड
सिंचाई और खाद का रखें विशेष ध्यान
खेत में पौधों की रोपाई करते समय सही दूरी रखना जरूरी है. इससे पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिलते हैं. हरी मिर्च की फसल में जरूरत के अनुसार सिंचाई करना जरूरी है. सर्दियों में सामान्य तौर पर गर्मियों के मुकाबले कम पानी की जरूरत पड़ती है. ऐसे में मिट्टी की नमी देखकर ही सिंचाई करें. इस बात का भी ध्यान रखें कि फूल आने और फल बनने के समय पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए. मिर्च की फसल में थ्रिप्स, माइट्स, सफेद मक्खी और पत्ती सिकुड़ने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. इनसे बचाव के लिए खेत की नियमित निगरानी करें. वहीं संक्रमित पौधों और खरपतवार को समय पर हटाएं.
शानदार होगी कमाई
हरी मिर्च के फल जब पूरी तरह विकसित हो जाएं, लेकिन हरे रंग में ही हों, तब उनकी तुड़ाई की जा सकती है. नियमित अंतराल पर तुड़ाई करने से पौधों पर नए फल आने में मदद मिलती है. तुड़ाई के बाद मिर्च को छायादार जगह पर रखें और बाजार तक पहुंचाने में देरी न करें. हरी मिर्च की उपज लगभग 20-25 टन प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है. वहीं कमाई बाजार की मांग पर निर्भर करती है. हालांकि हरी मिर्च एक ऐसी फसल है जिसकी जरूरत घरों से लेकर होटलों और रेस्टोरेंट तक होती है. ऐसे में किसान इससे अच्छी आमदनी कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें: Lumpy Disease: मवेशी के शरीर पर गांठों को न करें नजरअंदाज, तुरंत करें यह काम
