खेती किसानी और पशुपालन की दुनिया में आजकल लोग कुछ अलग करने की सोच रहे हैं. गाय और भैंस पालना तो बहुत आम बात हो गई है. लेकिन आज हम बात कर रहे हैं मगातिह ऊंटनी के बारे में जो कि काफी खास नस्ल मानी जाती है. नार्मली ऊंटनी के दूध की बात हो तो अक्सर राजस्थान का नाम सामने आता है. लेकिन मगातिह ऊंटनी का नाम सुनकर कई लोग सोचते हैं कि यह भारत की कोई खास नस्ल होगी.
लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि मगातिह सऊदी अरब में पाई जाने वाली ऊंटनी है. इसकी दूध देने की क्षमता काफी ज्यादा होती है. लेकिन इस नस्ल की खास बात यह है कि यह हर जगह नहीं पाई जाती है. चलिए आपको बताते हैं कितना दूध देती है मगातिह ऊंटनी और भारत में कहां पाई जा सकती है यह नस्ल.
एक दिन में कितना दूध देती है यह ऊंटनी?
ऊंटनी दूध को लेकर बात की जाए तो सऊदी अरब में हुई एक स्टडी में मगातिह, माजाहीम और अवारिक किस्म की ऊंटनियों के दूध की तुलना की गई थी. शोधकर्ताओं ने हर प्रकार की दस ऊंटनियों को बराबर परिस्थितियों में रखा और दस महीने तक उनके दूध का रिकॉर्ड लिया. इस दौरान मगातिह ऊंटनी से एवरेज करीब 1749 किलोग्राम दूध मिला. पूरे समय का डेली एवरेज निकालें तो यह करीब 5 से 6 किलोग्राम दूध प्रतिदिन बैठता है.
हालांकि सामान्य तौर पर इस लिमिट को तय आंकड़ा नहीं मान सकते हैं. रोज कितना दूध मिलेगा यह उस ऊंटनी और उसकी देखभाल पर भी निर्भर करेगा. आपको बता दें इस स्टडी में दूध उत्पादन चौथे महीने के करीब सबसे ज्यादा पाया गया था. दूध उत्पादन के मामले में संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संस्था FAO कहती है कि सामान्य पालन व्यवस्था में ऊंटनी से एक दिन में 5 लीटर दूध मिलना अच्छा उत्पादन माना जाता है.

भारत में कहां मिलेगी मगातिह ऊंटनी?
अब बात करते हैं कि भारत में मगातिह ऊंटनी कहां मिलती है. तो आपको बता दें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो यानी ICAR-NBAGR की रजिस्टर्ड ऊंट नस्लों की सूची में मगातिह शामिल नहीं है. उस सूची में बीकानेरी, जैसलमेर, मारवाड़ी और मेवाड़ी जैसी राजस्थान से जुड़ी नस्लें दर्ज हैं.
देश में रेगिस्तानी इलाकों जैसे राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में यह बेहतरीन नस्लें पाई जाती हैं. राजस्थान के बीकानेर और जैसलमेर जैसे जिलों में पारंपरिक पशुपालक इन ऊंटों को संभालकर रखते हैं. इसके अलावा गुजरात के कच्छ इलाके में भी इस नस्ल से जुड़े और ऊंट-ऊंटनियों मिल जाते हैं.
अगर कोई पशुपालक इसे खरीदना चाहता है तो उसे सीधे तौर पर वहां के स्थानीय मेलों और पशुपालकों से संपर्क करना पड़ता है. पुष्कर का ऊंट मेला इसके लिए सबसे बेहतरीन जगह मानी जाती है जहां देश भर से व्यापारी आते हैं. हालांकि मगातिह ऊंटनी मिलेगी या नहीं यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता.

यह भी पढ़ें: कैसे करें शरबती गेहूं की खेती? एक ही फसल में हो जाएंगे मालामाल
ऊंटनी के दूध की बढ़ती डिमांड
आज के समय में डेयरी इंडस्ट्री में ऊंटनी के दूध का कारोबार एक उभरता हुआ सेक्टर बन चुका है. लोग अपनी सेहत को लेकर इतने ज्यादा जागरूक हो गए हैं कि वे इसके लिए मुंह मांगा पैसा देने को तैयार रहते हैं. मगातिह ऊंटनी का दूध शरीर की कई बड़ी बीमारियों को दूर करने में बहुत मददगार साबित होता है. बड़े-बड़े शहरों में इसकी पैकेजिंग करके इसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स के रूप में बेचा जाने लगा है.
अगर आप भी पशुपालन के जरिए अपनी किस्मत बदलना चाहते हैं तो यह बिजनेस आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. इसमें शुरुआती मेहनत जरूर थोड़ी ज्यादा होती है लेकिन मुनाफा इतना तगड़ा होता है कि आप एक ही सीजन में मालामाल हो सकते हैं. अगर आपके पास भी खुली जगह और थोड़ी सी पूंजी है तो यह बिजनेस आपके लिए बढ़िया साबित हो सकता है.
यह भी पढ़ें: किसानों के लिए बड़ा ऐलान, 6% ब्याज दर पर मिलेगा 6 लाख का लोन
