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नींबू उगाने के लिए खेत में ऐसे बनाएं अलग बाड़, बढ़ जाएगी कमाई

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ABP News
October 24, 2026•3 min read
नींबू उगाने के लिए खेत में ऐसे बनाएं अलग बाड़, बढ़ जाएगी कमाई

भारत के ग्रामीण इलाकों में किसान भाई पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अब बागवानी की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. अमूमन किसान अपने पूरे खेत में नींबू का बाग लगाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खेत की खाली मेड़ या बाउंड्री पर नींबू उगाकर भी मोटी कमाई की जा सकती है? जी हां, कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खेत के चारों तरफ नींबू के पौधों की एक खास बाड़ तैयार करके किसान दोहरा मुनाफा कमा सकते हैं. यह अनोखा तरीका न केवल आपके मुख्य खेत को आवारा पशुओं से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि आपको बाजार से अतिरिक्त आमदनी भी दिलाता है.

जैविक बाड़ लगाने का क्या है सही तरीका

खेत के किनारों पर नींबू की बाड़ बनाने के लिए सही दूरी और खास पैटर्न का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. इसके लिए खेत की मेड़ पर दो से तीन पंक्तियों में जिग-जैग पैटर्न में गड्ढे तैयार किए जाते हैं. दो पौधों के बीच की दूरी आमतौर पर 4 से 5 फीट रखी जाती है, ताकि जब ये पौधे बड़े हों तो आपस में घने होकर जुड़ जाएं. इस तरह का सघन प्लांटेशन एक ऐसी मजबूत और प्राकृतिक दीवार खड़ी कर देता है, जिसे पार करना किसी भी जानवर के लिए नामुमकिन हो जाता है.

सुरक्षा के साथ बंपर मुनाफा

खेत में कटीले तार या लोहे की जाली लगाने में किसानों का बहुत ज्यादा पैसा खर्च हो जाता है और उससे कोई अतिरिक्त कमाई भी नहीं होती. इसके विपरीत, नींबू की यह जैविक बाड़ एक बार तैयार होने के बाद सालों-साल मुफ्त की सुरक्षा देती है. इसके कटीले तने और पत्तों की गंध के कारण नीलगाय, आवारा पशु और जंगली जानवर खेत के पास भी नहीं फटकते. सुरक्षा के इस बड़े फायदे के साथ-साथ, जब इन पेड़ों पर नींबू आने शुरू होते हैं तो हर हफ्ते सैकड़ों किलो उपज मिलती है. इसे स्थानीय मंडियों में बेचकर किसान भाई घर बैठे एक बेहतरीन अतिरिक्त आय का जरिया बना लेते हैं.

मिट्टी की तैयारी और पौधों का चयन

इस बाड़ को मजबूत बनाने के लिए कागजी नींबू या कुंभकांच जैसी हाइब्रिड किस्मों का चयन करना चाहिए, जिनमें कांटे अधिक होते हैं और फल भी ज्यादा आते हैं. बुवाई से पहले मेड़ के किनारे करीब 1-1 फीट गहरे गड्ढे खोदकर उन्हें कुछ दिनों के लिए धूप में छोड़ दें. इसके बाद, मिट्टी में अच्छी मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद और जैविक उर्वरक मिलाकर गड्ढों को भर दें. पौधों की रोपाई के लिए जुलाई से अगस्त का समय सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान पौधों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़ लेती हैं.

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देखभाल और सिंचाई का आसान गणित

नींबू के पौधों को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती. शुरुआत के एक-दो साल तक इनकी समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण करना जरूरी होता है. बाड़ को घना बनाए रखने के लिए साल में एक बार पौधों की हल्की छंटाई जरूर करें, जिससे नई और घनी शाखाएं निकल सकें. सिंचाई के लिए अगर ड्रिप सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए, तो पानी की भारी बचत होती है और पौधों का विकास भी एक समान होता है.

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