Low Tunnel Farming: सर्दियों में ठंड की वजह से सब्जियों की खेती करने वाले किसानों की परेशानी भी बढ़ जाती है. खासकर तरबूज, खरबूजा, खीरा और लौकी जैसी फसलों के छोटे पौधों को ठंड से नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में अगर आप भी अपनी फसल को मौसम से पहले तैयार कर के बाजार में पहुंचाना चाहते हैं, तो आप लो टनल तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं.
लो टनल तकनीक से पौधों को ठंड से बचाने में मदद मिलती है. इसके साथ ही इस तकनीक से पौधों की बढ़वार भी तेज होता है. इससे किसानों को सब्जियों की फसल जल्दी तैयार करने और शुरुआती बाजार का फायदा उठाने का मौका मिल सकता है.
क्या है लो टनल तकनीक?
लो टनल तकनीक में खेत में लगी फसल की कतारों के ऊपर प्लास्टिक की चादर से छोटी सुरंग जैसी बनाई जाती है. इसके लिए लोहे या दूसरी मजबूत सामग्री के मुड़े हुए ढांचे लगाए जाते हैं और उन पर प्लास्टिक की फिल्म बिछा दी जाती है. इससे पौधों के आसपास का तापमान बाहर के मुकाबले कुछ ज्यादा बना रह सकता है. खासकर ठंडी रातों में छोटे पौधों को बचाने में मदद मिलती है. सही देखभाल करने पर फसल की शुरुआती बढ़वार अच्छी हो सकती है और उत्पादन जल्दी शुरू होने की संभावना बढ़ जाती है.
ऐसे तैयार करें लो टनल
- लो टनल से खेती करने के लिए सबसे पहले खेत में थोड़ी ऊंची क्यारियां बनाएं.
- इसके बाद पौधों को सही दूरी पर लगाएं.
- खेत में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग और बूंद-बूंद सिंचाई का इस्तेमाल किया जा सकता है.
- अब क्यारियों के ऊपर कुछ दूरी पर मुड़े हुए ढांचे लगाएं और उन पर प्लास्टिक की फिल्म चढ़ा दें.
- ध्यान रखें कि फिल्म ठीक से लगी हो और तेज हवा में उड़ने न पाए.
- पौधों के बढ़ने के लिए अंदर पर्याप्त जगह भी होनी चाहिए.

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कौन-सी फसलों में मिलेगा फायदा?
लो टनल तकनीक का इस्तेमाल तरबूज, खरबूजा, लौकी, करेला और खीरा जैसी फसलों में किया जा सकता है. इसके लिए करीब 30 माइक्रोन मोटाई वाली खास प्लास्टिक फिल्म भी इस्तेमाल होती है. बाजार में ऐसी फिल्म मिलती है, जो सूरज की तेज किरणों का असर कम करने और अंदर पानी की बूंदें जमा होने की समस्या घटाने में मदद करती है. हालांकि, फिल्म का चुनाव फसल और मौसम के हिसाब से करना चाहिए.
रोजाना देखभाल करना भी जरूरी
लो टनल लगाने के बाद पौधों को बिना देखभाल के नहीं छोड़ना चाहिए. दिन में धूप तेज होने पर अंदर ज्यादा गर्मी हो सकती है. ऐसे में जरूरत के मुताबिक प्लास्टिक को थोड़ा खोलकर हवा आने-जाने दें. वहीं, रात में ठंड बढ़ने पर फिल्म को सही तरीके से बंद रखें. जब मौसम गर्म होने लगे, तो प्लास्टिक अचानक पूरी तरह न हटाएं. पहले पौधों को धीरे-धीरे बाहर के मौसम की आदत डालें. इससे फसल को नुकसान होने का खतरा कम रहेगा और किसान जल्दी उपज लेने की कोशिश कर सकेंगे.
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