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घर के किचन गार्डन में उगा सकते हैं पपीता, जान लें ये तरीका

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ABP News
September 16, 20264 min read
घर के किचन गार्डन में उगा सकते हैं पपीता, जान लें ये तरीका

अक्सर बहुत से लोगों को अपने घर में सब्जियां उगाने का शौक होता है. अगर आप भी इन्हीं लोगों में शामिल हैं. तो फिर आप अपने किचन गार्डन में फलों के पौधे भी लगा सकते हैं. पपीता इसके लिए एक अच्छा ऑप्शन है. अगर आंगन में खुली जगह है और अच्छी धूप आती है तो इसकी शुरुआत कर सकते हैं. अपने लगाए पौधे पर फल लगते देखना अलग खुशी देता है.

इसके साथ ही घर में ताजा फल भी मिल सकता है. हालांकि पौधा लगाने से पहले उसकी जरूरतों को समझना जरूरी है. किचन गार्डन में पपीता उगाने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. क्योंकि आपने इसे उगाने की शुरुआत कुछ गलतियां कर दीं तो फिर सही फल नहीं मिल पाएंगे. चलिए आपको बताते हैं घर पर पपीता उगाने का सही तरीका.

सबसे पहले सही जगह और पौधा चुनें

पपीते खुली धूप और गर्म मौसम उगाया जाता है. किचन गार्डन का ऐसा हिस्सा चुनें जहां बड़े पेड़ों की छाया न पड़ती हो. तेज हवा से बचाव भी होना चाहिए क्योंकि इसका तना मजबूत लकड़ी वाले पेड़ों जैसा नहीं होता. पौधे को दीवार से सटाकर न लगाएं. पत्तियों के फैलने के लिए जगह छोड़ें. पाला पड़ने वाले इलाकों में सर्दियों के दौरान खास देखभाल करनी होगी. इसके पौधे को ठंडी हवा से बचा के रखें मौसम सुधर जाए तो रोपाई करें.

जगह कम है तो नर्सरी से कम ऊंचाई वाली किस्म के बारे में पूछें. पपीते में नर और मादा पौधों के अलावा ऐसे पौधे भी होते हैं जिनके फूल में दोनों भाग मौजूद रहते हैं. इन्हें उभयलिंगी कहते हैं. यह खुद परागण करके फल दे सकते हैं. सिर्फ एक पौधा लगाना है तो इस खासियत वाला पहचाना हुआ पौधा लेना उपयोगी रहेगा. फल से निकाले बीज से उगा हर पौधा फल देगा. ऐसा जरूरी नहीं है. इसलिए पौधा चुनते समय इसकी जानकारी लें.

बीज से पौधा तैयार करने का आसान तरीका

बीज से शुरुआत करना चाहते हैं तो पके पपीते के बीज निकालें. उनके ऊपर लगी चिकनी परत हल्के हाथ से साफ करके पानी से धो लें. फिर छाया में रखकर सतह का पानी सूखने दें. छोटे कंटेनर में बीज बो सकते हैं. नीचे पानी निकलने के छेद जरूर हों. साफ और भुरभुरा मिश्रण भरें. बीज करीब एक सेंटीमीटर गहराई पर बोएं और ऊपर हल्की परत डालें. इसके बाद धीरे पानी दें ताकि बीज अपनी जगह से न हटें.

मिट्टी नम रखें लेकिन कंटेनर में पानी जमा न होने दें. छोटे पौधे को तुरंत तेज धूप में रखने के बजाय धीरे धूप की आदत डालें. करीब डेढ़ से दो महीने में स्वस्थ पौध रोपाई लायक हो सकती है. क्यारी की मिट्टी भुरभुरी करें और अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद मिलाएं. पौधा निकालते समय जड़ों के आसपास की मिट्टी न बिखेरें. उसे पहले जितनी गहराई पर ही लगाएं. तने को ज्यादा गहरा दबाने से बचें. रोपाई के बाद पानी दें और पौधा सीधा रखें.


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कब मिलेंगे फल?

पानी देने से पहले मिट्टी देखें. नमी बनी है तो तुरंत दोबारा सिंचाई करने की जरूरत नहीं है. मौसम और मिट्टी के हिसाब से पानी दें. जड़ों के पास लगातार पानी भरने से सड़न हो सकती है. गोबर की खाद पूरी तरह सड़ी हुई इस्तेमाल करें. पौधे की उम्र के हिसाब से पोषण की सलाह नर्सरी से लें. पत्तियों पर सफेद कीड़े और असामान्य धब्बे दिखें तो पहचान कराएं. बिना वजह दवा छिड़कने से बचें. सूखी पत्तियां हटाकर आसपास सफाई रखें.

सही मौसम और अच्छी देखभाल में रोपाई के करीब 7 से 11 महीने बाद फल मिलने शुरू हो सकते हैं. फूल आने पर पौधे की देखभाल रेगुलर करते रहें. पपीते का छिलका हरे से पीला पड़ने लगे तो फल तोड़ सकते हैं. उसे खींचकर गिराने के बजाय डंठल सावधानी से काटें. खाने के लिए कमरे में पकने दें और पकने के बाद तरह घर में उगे पपीते का स्वाद ले सकते हैं.

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