Stubble Burning: क्या आप भी धान की कटाई के बाद पराली को खेतों में ही जला देते हैं? अगर हां तो ये गलती आपके लिए बड़ी परेशानी बन सकती है. आपको बता दें कि, पुलिस और प्रशासन की निगरानी के साथ-साथ पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई भी की जा रही है.
अगर किसी किसान के खेत में पराली जलती पाई जाती है, तो उस पर हजारों रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसलिए किसानों को पराली जलाने के बजाय उसे खेत में इस्तेमाल करने या दूसरे सुरक्षित तरीकों को अपनाने की जरूरत है.
पराली जलाने पर कितना लग सकता है जुर्माना?
पराली जलाने पर लगने वाला पर्यावरण मुआवजा किसान के पास मौजूद जमीन के रकबे के हिसाब से तय किया गया है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दायरे में आने वाले इलाकों में नवंबर 2024 से लागू नियमों के मुताबिक जुर्माने की रकम पहले के मुकाबले दोगुनी कर दी गई थी.
- 2 एकड़ से कम जमीन: 5,000 रुपये का जुर्माना.
- 2 से 5 एकड़ तक जमीन: 10,000 रुपये का पर्यावरण मुआवजा.
- 5 एकड़ से ज्यादा जमीन: 30,000 रुपये का पर्यावरण मुआवजा.
यह जुर्माना हर बार पराली जलाने की घटना के हिसाब से लगाया जाता है. यानी अगर कोई किसान बार-बार पराली जलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर हर बार दोबारा कार्रवाई हो सकती है.
चालान नहीं भरा तो बढ़ सकती है परेशानी
पराली जलाने की घटना सामने आने पर संबंधित अधिकारी जांच और कार्रवाई कर सकते हैं. किसान को पर्यावरण मुआवजे का चालान दिया जाता है, जिसे तय समय के अंदर जमा करना होता है. नियमों के मुताबिक, चालान मिलने के 30 दिनों के भीतर रकम जमा करनी होती है. अगर किसान ऐसा नहीं करता है, तो बकाया रकम जमीन के राजस्व बकाये की तरह वसूली जा सकती है.
इसके अलावा जमीन के रिकॉर्ड में लाल निशान यानी रेड एंट्री दर्ज करने का भी प्रावधान है. सितंबर 2026 में जारी नए मसौदे में इस एंट्री को 15 महीने तक रखने का प्रस्ताव दिया गया है. हालांकि, यह अभी मसौदा है, इसे अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए.
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पराली जलाने के बजाय अपनाएं ये तरीके
किसानों के लिए पराली का सही इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए खेत में पराली को काटकर मिट्टी में मिलाया जा सकता है. इससे धीरे-धीरे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिलती है. इसके अलावा हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और अन्य फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की मदद से पराली को हटाए बिना अगली फसल की बुवाई की जा सकती है.
कई जगहों पर पराली को पशुओं के चारे, खाद और बायोमास जैसे कामों में भी इस्तेमाल किया जाता है. किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से मशीनों और सरकारी मदद की जानकारी ले सकते हैं.
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