Lumpy Disease Prevention: पशुपालकों के लिए लम्पी स्किन डिजीज एक बड़ी परेशानी बन सकती है. यह एक वायरल बीमारी होती है, जो एक पशु से दूसरे पशु तक फैल सकती है. इसकी चपेट में आने पर पशु को तेज बुखार आता है और शरीर पर जगह-जगह गांठें निकलने लगती हैं. बीमारी बढ़ने पर पशु खाना-पीना छोड़ सकता है और उसका दूध देना भी कम हो जाता है.
लम्पी स्किन डिजीज एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस को प्रभावित करता है. यह बीमारी कैप्रिपॉक्स वायरस से होती है. इसका फैलाव ज्यादातर मच्छर, मक्खी, किलनी और खून चूसने वाले दूसरे कीड़ों के जरिए होता है. इसके अलावा संक्रमित पशु के सीधे संपर्क में आने या उसके इस्तेमाल की चीजों से भी बीमारी फैलने का खतरा रहता है.
पशु के शरीर पर दिखेंगी ऐसी गांठें
इस बीमारी की शुरुआत अक्सर तेज बुखार से होती है. इसके बाद पशु के शरीर, गर्दन, सिर और पैरों पर छोटी-बड़ी सख्त गांठें निकलने लगती हैं. इन गांठों का आकार करीब 2 से 5 सेंटीमीटर तक हो सकता है. इसके अलावा पशु सुस्त रहने लगता है और चारा-पानी कम कर देता है.
कुछ पशुओं की आंखों और नाक से पानी आने लगता है. पैरों में सूजन हो सकती है और उन्हें चलने में परेशानी होती है. कई बार मुंह से लार भी गिरने लगती है. बीमारी का असर बढ़ने पर शरीर की गांठों के आसपास घाव बन सकते हैं. इसका सीधा असर पशु की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है. कुछ मामलों में प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.
लक्षण दिखते ही बीमार पशु को करें अलग
- अगर गाय या भैंस में बुखार, गांठ या ऐसे दूसरे लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें.
- उसके खाने-पीने के बर्तन भी अलग रखें और उसे दूसरे पशुओं के साथ चरने के लिए न भेजें.
- पशु को नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल या पशु चिकित्सक को दिखाएं.
- बीमार पशु की जगह को साफ और सूखा रखें.
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा या इंजेक्शन न दें.
- इस बीमारी का कोई खास एंटीवायरल इलाज नहीं है.
- डॉक्टर पशु के बुखार, दर्द, घाव और दूसरी परेशानियों के हिसाब से इलाज करते हैं.

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लम्पी बीमारी से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके
इस बीमारी से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण सबसे जरूरी है. पशुपालकों को स्वस्थ पशुओं का टीका पशु चिकित्सक की सलाह और तय कार्यक्रम के अनुसार लगवाना चाहिए. इसके अलावा पशुशाला में मच्छर-मक्खियों को पनपने न दें और आसपास पानी जमा न होने दें.
पशुशाला, फर्श और बर्तनों की नियमित सफाई करें. बाहर से खरीदे गए नए पशु को कुछ समय तक बाकी पशुओं से अलग रखें. बीमारी फैलने की स्थिति में पशुओं को दूसरे इलाकों में ले जाने से बचें. रोजाना पशु के खाने-पीने, दूध देने और शरीर पर गांठ या सूजन जैसे बदलावों पर नजर रखें.
टीकाकरण और निगरानी पर भी जोर
लम्पी बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सरकारी स्तर पर भी टीकाकरण और निगरानी अभियान चलाए जाते हैं. प्रभावित इलाकों में पशुओं को टीका लगाने, बीमार पशुओं को अलग रखने और कीड़े-मकोड़ों पर नियंत्रण करने जैसे कदम उठाए जाते हैं. पशुपालकों को भी चाहिए कि वे बीमारी का कोई लक्षण दिखने पर उसे छिपाएं नहीं और तुरंत पशु चिकित्सा विभाग को जानकारी दें.
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