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भारत ने भूटान को गिफ्ट कीं 43 जर्सी गाय, एक दिन में कितना देती है दूध?

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ABP News
September 18, 20264 min read
भारत ने भूटान को गिफ्ट कीं 43 जर्सी गाय, एक दिन में कितना देती है दूध?

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर 16 से 17 सितंबर के दौरान आधिकारिक दौरे पर भूटान गए हुए थे. जहां उन्होंने दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा की और दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने को भी बातचीत हुई. बता दें कि भारत और भूटान के बीच आपसी कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं. और अब यह साझेदारी कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रही है.

इस दौरे के दौरान भारत ने भूटान के डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए 43 जर्सी गायें उपहार में दी हैं. यह कदम दोनों पड़ोसी देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और तकनीकी सहयोग को मजबूत करता है. इन बढ़िया नस्ल की जर्सी गायों के मिलने से वहां के दुग्ध उत्पादन पर क्या असर पड़ेगा और एक सामान्य जर्सी गाय रोजाना कितना दूध देती है. चलिए आपको बताते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

भारत ने भूटान को दीं 43 जर्सी गायें

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के इस भूटानी दौरे के दौरान एग्रीकल्चरल कोऑपरेशन को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है. भूटान के बूमथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर में आयोजित एक स्पेशल कार्यक्रम के दौरान भारत की ओर से 43 जर्सी गायें सौंपी गईं. भारत की इस अनूठी सौगात का मुख्य उद्देश्य भूटान के स्थानीय डेयरी प्रोडक्शन को आधुनिक तकनीक और बेहतरीन नस्ल के जरिए बढ़ावा देना है.

बूमथांग का यह नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर पिछले काफी समय से भूटान में पशुपालन को उन्नत बनाने के लिए काम कर रहा है, और भारत की यह मदद इस सेंटर की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुद इस बात पर जोर दिया है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ विकास के अनुभवों को साझा करने में हमेशा आगे रहता है.


जर्सी गाय एक दिन में कितना दूध देती है?

अब बहुत से लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि आखिर जर्सी गाय एक दिन में कितना दूध देती है और यह दूसरी नस्लों से इतनी अलग क्यों मानी जाती है? कृषि विशेषज्ञों और डेयरी एक्सपर्ट्स के मुताबिक जर्सी नस्ल की गायें अपनी उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता यानी मिल्क यील्ड के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं. एक स्वस्थ और अच्छी तरह से देखभाल की गई जर्सी गाय रोजाना औसतन 15 से 30 लीटर तक दूध आसानी से दे सकती है.

इसके अलावा इस नस्ल के दूध में फैट और सॉलिड्स की मात्रा भी बहुत अच्छी होती है. जो इसे कमर्शियल डेयरी फार्मिंग के लिए सबसे बढ़िया बनाती है. भूटान के ठंडे और पहाड़ी एरिया में जर्सी गायें बहुत ही आसानी से ढल जाती हैं. क्योंकि इनका शरीर वहां के मौसम के अनुकूल खुद को ढालने में सक्षम होता है. कम चारे और रखरखाव में भी यह बंपर पैदावार देती हैं. जिससे वहां के पालकों को तगड़ा मुनाफा मिलता है.


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40 हजार से अधिक किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

भारत सरकार द्वारा गिफ्ट की गई इन 43 जर्सी गायों का फायदा भूटान के हजारों किसानों को मिलेगा. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर के इस उन्नत ब्रीडिंग प्रोग्राम से भूटान के लगभग 40000 से अधिक स्थानीय किसानों को सीधा और प्रत्यक्ष लाभ पहुंचने के पूरी चांस है. जब इस नस्ल की जर्सी गायों की ब्रीडिंग आगे बढ़ेगी. तो स्थानीय किसानों को भी बेहतरीन क्वालिटी के बछड़े और उन्नत नस्लें मिल सकेंगी.

इससे भूटान में दूध की जो कमी अक्सर लोकर लेवल पर महसूस होती थी. वह दूर होगी और देश डेयरी प्रोडक्ट्स के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर बन सकेगा. इस तरह की के प्रोजेक्ट दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग के नए मौके बनाती हैं.

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