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खरीफ सीजन के बाद खेत में बोएं आलू, 80 से 100 दिन में हो जाएगा तैयार

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ABP News
September 27, 2026•4 min read
खरीफ सीजन के बाद खेत में बोएं आलू, 80 से 100 दिन में हो जाएगा तैयार

अक्सर ऐसा होता है कि खरीफ सीजन की फसल काटने के बाद किसान अपने खेत को यूं ही खाली छोड़ देते हैं. जिससे अगली बड़ी फसल का वक्त आ सके. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर इसी खाली समय में खेत से एक और फसल ले ली जाए तो आपकी आमदनी कितनी बढ़ सकती है? आज हम आपको एक ऐसा दमदार तरीका बताने जा रहे हैं. जो आपकी खाली पड़ी जमीन से कमाई का रास्ता खोल सकता है.

खरीफ की फसल यानी धान या मक्के की कटाई के तुरंत बाद अगर आप अपने खेतों में आलू की बुआई कर दें. तो यह आपके लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है. आलू की कई ऐसी उन्नत किस्में आती हैं जो महज 80 से 100 दिन के अंदर पूरी तरह से तैयार हो जाती हैं. यानी कम समय और कम मेहनत में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने का यह सबसे बेहतरीन तरीका है. इससे न केवल आपके खेत की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है. बल्कि कमाई भी सही होती है.

खेत की सही तैयारी और सही मिट्टी का चुनाव

अगर आप आलू की बंपर पैदावार लेना चाहते हैं. तो सबसे पहले आपको अपने खेत की तैयारी पर खास ध्यान देना होगा. आलू की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. क्योंकि इसमें पानी ज्यादा देर रुकता नहीं है और आलू के कंदों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है. मक्का और धान की फसल काटने के बाद बिना एक भी दिन गंवाए खेत की 3 से 4 बार अच्छी तरह जुताई करवा लें.

इसके बाद खेत में पाटा लगाकर मिट्टी को एकदम भुरभुरी और समतल बना लें. आपको इस बात का हमेशा ध्यान रखना है कि खेत में पानी बिल्कुल भी नहीं रुकना चाहिए. क्योंकि ज्यादा नमी और जलभराव होने पर आलू के सड़ने का खतरा बहुत बढ़ जाता है. अगर आप सही समय पर मिट्टी को सुधारकर खेत तैयार कर लेते हैं. तो पौधों को एकदम सही माहौल मिलता है और उनकी ग्रोथ बहुत तेजी से होती है.


सही बीज और उन्नत किस्मों का चयन

खेती में आधी सफलता तो इस बात पर टिकी होती है कि आप बीज कैसा चुन रहे हैं. आलू की खेती करते वक्त इस बात का पूरा ख्याल रखें कि आपके पास जो बीज कंद हैं वे एकदम स्वस्थ, साफ और किसी भी बीमारी से मुक्त होने चाहिए. आमतौर पर 25 से 30 ग्राम वजन के बीज कंद सबसे सही माने जाते हैं. बुआई करने से पहले बीजों की अच्छी तरह छंटाई कर लें जिससे कोई भी सड़ा या कटा हुआ आलू खेत के अंदर न जा सके.

आज के समय में बाजार में कई ऐसी बेहतरीन वैराइटी मौजूद हैं जो बहुत कम दिनों में शानदार पैदावार देती हैं. इन किस्मों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि ये महज 80 से 100 दिन के भीतर खुदाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती हैं. आप अपने इलाके की जलवायु और जमीन के हिसाब से सही किस्म का चुनाव करके बंपर पैदावार हासिल कर सकते हैं.

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इन बातों का रखें ध्यान

सिर्फ बीज जमीन में डाल देने से ही अच्छी फसल नहीं मिल जाती. बल्कि उसकी लगातार देखभाल करनी पड़ती है. आलू की फसल को समय पर पानी और सही मात्रा में खाद की बहुत जरूरत होती है. आपको इस बात का ध्यान रखना है कि खेत में जरूरत से ज्यादा पानी न भरें बल्कि मिट्टी की नमी को देखकर ही हल्की सिंचाई करें. इसके अलावा खेत में उगने वाले खरपतवार को समय-समय पर निकालते रहें.

जिससे पौधों का पूरा पोषण आलू तक पहुंचे. जब पौधा थोड़ा बड़ा हो जाए तो उसके चारों तरफ मिट्टी चढ़ाने का काम जरूर करें इससे आलू के कंद धूप में हरे नहीं पड़ते और उनका साइज एकदम बढ़िया बनता है. अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का पूरा ध्यान रखते हैं. तो खरीफ सीजन के तुरंत बाद उगाई गई यह आलू की फसल आपको कम लागत में तगड़ी कमाई दे सकती है.


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