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धान-जूट छोड़ करें इस चीज की खेती, हर साल होगी 9 लाख की कमाई

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ABP News
August 27, 20264 min read
धान-जूट छोड़ करें इस चीज की खेती, हर साल होगी 9 लाख की कमाई

पारंपरिक तौर पर धान और जूट की खेती करने वाले किसान अक्सर मौसम की मार, भारी मजदूरी और मंडियों में गिरते दामों से परेशान रहते हैं. दिन-रात की मेहनत और पानी की भारी बर्बादी के बाद भी हाथ में मुनाफा बहुत कम आ पाता है. ऐसे में अब वक्त आ गया है कि किसान घाटे की पुरानी खेती छोड़कर ज्यादा मुनाफे वाली चीजों की ओर रुख करें. देश के कई किसान अब धान और जूट के बजाय काली मिर्च की खेती की तरफ बढ़ रहे हैं.

मसालों का राजा कही जाने वाली काली मिर्च की घरेलू और ग्लोबल मार्केट में सालभर जबरदस्त डिमांड रहती है. इसके लिए आपको बहुत बड़े रकबे की ओर दिन-रात की निगरानी की जरूरत नहीं पड़ती. अगर सही तकनीक, उन्नत किस्मों के साथ इसका फार्म तैयार किया जाए. तो एक एकड़ जमीन से भी हर साल आराम से 9 लाख रुपये की कमाई पक्की की जा सकती है.

काली मिर्च लगाने का सही तरीका

काली मिर्च की सीधी खेती के लिए खेत का ढांचा सही तरीके से तैयार करना सबसे जरूरी काम है. यह एक बेल वाली फसल है. जिसे ऊपर चढ़ाने के लिए पूरे खेत में कंक्रीट के खंभे या मजबूत बांस के पोल्स का स्ट्रक्चर बनाया जाता है. पौधों को लगाने के लिए 8x8 या 10x10 फीट की दूरी पर 2x2 फीट के गहरे गड्ढे खोदे जाते हैं.

इन गड्ढों में सड़ी हुई गोबर की खाद, केंचुआ खाद और नीम की खली भरकर अच्छी उपजाऊ मिट्टी तैयार की जाती है. बाजार में पन्नियूर-1, करिमुंडा और सुभकरा जैसी उन्नत किस्में मौजूद हैं जो अकेले दम पर बंपर पैदावार देती हैं. अच्छी ग्रोथ के लिए हल्की छाया और हवा में नमी का होना फायदेमंद रहता है. बुवाई के बाद पौधों की जड़ों में पानी के लिए ड्रिप इरिगेशन लाइन बिछाएं. जिससे पानी सीधे जड़ों तक पहुंचे और बर्बादी बिल्कुल न हो.


पौधों की देखभाल, कटाई और प्रोसेसिंग का तरीका

खेत तैयार होने के बाद शुरुआती दो साल तक बेलों को खंभों पर सही डायरेक्शन में चढ़ाने और उनकी कटाई-छंटाई पर ध्यान देना होता है. तीसरे साल से लताओं पर हरे दानों के गुच्छे यानी बालियां लटकना शुरू हो जाती हैं. जब ये गुच्छे हल्के पीले या लाल रंग के होने लगें तब इनकी सावधानी से तुड़ाई की जाती है. तुड़ाई के बाद दानों को डंडियों से अलग किया जाता है और फिर उबलते पानी में 1-2 मिनट डालकर तुरंत निकाल लिया जाता है.

इसके बाद इन्हें तेज धूप में 4 से 5 दिनों तक सुखाया जाता है. धूप में सूखते ही दानों की बाहरी त्वचा सिकुड़कर गहरे काले रंग की हो जाती है और शानदार खुशबूदार काली मिर्च तैयार हो जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आलू-प्याज की तरह जल्दी सड़ती नहीं है. इसे महीनों तक आसानी से स्टोर करके रखा जा सकता है.

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ऐसे होगी 9 लाख तक की कमाई

एक एकड़ में पोल सिस्टम से लगभग 700 से 800 काली मिर्च की बेलें आसानी से लगाई जा सकती हैं. जब पौधे पूरी तरह मैच्योर हो जाते हैं, तो एक स्वस्थ बेल से हर साल औसतन 3 से 4 किलो सूखी काली मिर्च मिलती है. इस तरह एक एकड़ खेत से सालाना करीब 2200 से 2500 किलो तक का बंपर कुल उत्पादन मिल जाता है. होलसेल मार्केट में ग्रेडिंग वाली अच्छी काली मिर्च का रेट औसतन 500 से 600 रुपये प्रति किलो के बीच टिका रहता है.


इस हिसाब से आपकी पूरी फसल मंडी में 11 से 12 लाख रुपये में आसानी से बिक जाती है. खाद, ड्रिप, बिजली और मजदूरों का सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये का खर्च निकाल भी दें. तो भी हर साल 9 लाख रुपये का नेट प्रॉफिट सीधे आपके बैंक खाते में आता है. धान और जूट के मुकाबले इसके प्राॅफिट को देखें तो यह कहीं ज्यादा है.

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