Farmers Success Stories: आमतौर पर जब भी खेती-किसानी की बात होती है, तो लोगों के दिमाग में गरीब और कर्ज में डुबा किसान, सूखा और घाटे की तस्वीर सामने आती है. लेकिन आज देश के युवा और प्रगतिशील किसान इस सोच को पूरी तरह से बदल रहे हैं. भारत के कई किसानों ने पारंपरिक खेती जैसे गेहूं, चावल को छोड़कर आधुनिक तकनीकों, एग्री-स्टार्टअप और ऑर्गेनिक मॉडल को अपना रहे हैं. अपनी मेहनत और नए आइडिया के दम पर ये किसान आज न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अन्य लोगों को रोजगार देकर हर साल लाखों-करोड़ों की मोटी कमाई भी कर रहे हैं. आज जानेगें भारत के कुछ ऐसे ही प्रगतिशील किसानों के बारे में.
प्रमोद गौतम
महाराष्ट्र के रहने वाले प्रमोद गौतम कभी एक ऑटोमोबाइल इंजीनियर हुआ करते थे, लेकिन हमेशा से उनका मन खेती करने में ही था. इसलिए साल 2006 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह खेती करने लगे. शुरुआत में घाटा हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने इनोवेशन का सहारा लिया और दालों की प्रोसेसिंग के लिए अपनी खुद की मिल शुरू कर दी. प्रमोद ने सीधे अपनी ब्रांडिंग की और बिना बिचौलियों के सीधे ग्राहकों को दालें बेचना शुरू किया. आज वे एक सफल एग्री-स्टार्टअप चला रहे हैं. उनके इस मॉडल से उनका सालाना टर्नओवर लाखों रुपये में पहुंच चुका है और वे सैकड़ों अन्य किसानों के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं.
भारत भूषण त्यागी
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले भारत भूषण त्यागी देश के सबसे बड़े प्रगतिशील किसानों में गिने जाते हैं. जैविक खेती में उनके योगदान के लिए सरकार उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाज चुकी है. त्यागी जी ने रासायनिक खादों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करके जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों से खेती करने का एक बेहतरीन मॉडल तैयार किया. उनके इस ऑर्गेनिक मॉडल को देखने और सीखने के लिए आज देशभर से युवा उनके पास आते हैं. वे अपनी जमीन पर कई तरह की फसलें एक साथ उगाते हैं मल्टी-क्रॉपिंग जिससे लागत कम होती है और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है.
हरीश धनदेव
राजस्थान के जैसलमेर जैसे सूखे इलाके में जहां पानी की भारी किल्लत है, वहां हरीश धनदेव ने खेती की तस्वीर ही बदल दी. सरकारी नौकरी छोड़कर हरीश ने अपनी बंजर जमीन पर एलोवेरा की खेती शुरू की. उन्होंने केवल फसल उगाई ही नहीं, बल्कि एलोवेरा जेल निकालने की एक छोटी यूनिट भी लगाई. आज वे डाबर और पतंजलि जैसी बड़ी कंपनियों को अपना प्रोडक्ट सप्लाई करते हैं. रेगिस्तान में इनोवेशन के दम पर हरीश आज सालाना लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं.
यह भी पढ़ें: गांव में शुरू करें बत्तख पालन, होगी अच्छी कमाई
कैसे बदल रहा खेती का पूरा ढांचा?
इन प्रगतिशील किसानों ने सिर्फ फसल नहीं उगाई, बल्कि उसकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और प्रोसेसिंग करके खुद बाजार में बेचना शुरू किया है. साथ ही ड्रिप इरिगेशन, पॉलीहाउस और ड्रोन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल करने से लागत भी कम हो गई है. इन किसानों ने बाजार में केमिकल-फ्री और ऑर्गेनिक अनाज, फल और सब्जियों की मांग को अच्छे से समझा, और इनकी खेती करके भारी मुनाफा कमा सके.
यह भी पढ़ें: केले में लगाएं काली मिर्च और कर दें दफन, फिर देखिए जादू
