अगर आपके फार्म हाउस पर जमीन का कुछ हिस्सा खाली पड़ा है. तो वहां खेती करके अच्छी कमाई का सोर्स तैयार किया जा सकता है. हॉलैंड कैरेट यानी डच गाजर इसका एक अच्छा ऑप्शन है. यह आम लाल गाजर से दिखने में अलग होती है. इसका रंग चमकदार नारंगी, स्वाद हल्का मीठा और टेक्सचर काफी क्रंची होता है. बड़े शहरों में प्रीमियम सब्जियों की डिमांड बढ़ने के साथ हॉलैंड कैरेट की भी अच्छी पूछ हो रही है.
फिटनेस पसंद करने वाले लोग, शेफ्स, कैफे, रेस्टोरेंट और प्रीमियम ग्रॉसरी स्टोर इसे खरीदते हैं. इसकी खेती में सबसे जरूरी बात है सही मिट्टी और बेहतर क्वालिटी की जड़ तैयार करना. अगर फार्म हाउस पर जमीन अच्छी है सिंचाई की सुविधा मौजूद है और पहले से बिक्री का मार्केट तैयार कर लिया जाए तो इस फसल से अच्छी कमाई का मौका बन सकता है.
ऐसे उगाएं हॉलैंड गाजर
हॉलैंड कैरेट की बढ़िया ग्रोथ के लिए जमीन हल्की, भुरभुरी और अच्छी ड्रेनेज वाली होनी चाहिए. मिट्टी में पानी रुकने पर गाजर की जड़ खराब हो सकती है. जमीन में ज्यादा कंकड़-पत्थर होने पर भी गाजर सीधी नहीं बढ़ती. ऐसे में उसका शेप बिगड़ सकता है और मार्केट वैल्यू कम हो सकती है.
फार्म हाउस की जमीन को पहले दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को ढीला कर लें. इसके बाद खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक खाद मिला सकते हैं. जमीन तैयार होने के बाद करीब 6 से 8 इंच ऊंचे रेज्ड बेड बनाएं. इससे पानी अच्छे तरीके से बाहर निकलता है.
बीजों की बुवाई करते समय उन्हें बहुत पास-पास लगाने से बचें. पौधों के बीच करीब 2 इंच की जगह रखें. इससे जड़ों को नीचे की तरफ बढ़ने के लिए पर्याप्त स्पेस मिलेगा. नतीजा यह होगा कि गाजर का शेप सीधा और साइज बेहतर बन सकता है.

खेती में इन बातों का रखें ध्यान
हॉलैंड कैरेट की खेती में कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखकर अच्छी फसल ली जा सकती है. जब पौधे करीब 2 से 3 इंच बड़े हो जाएं तब कमजोर पौधों को निकाल दें इसे थिनिंग कहा जाता है. इससे बचे हुए पौधों को खुलकर बढ़ने की जगह मिलती है.
खाद के मामले में भी बैलेंस जरूरी है. बहुत ज्यादा नाइट्रोजन देने पर पत्तियां तेजी से बढ़ सकती हैं, लेकिन जड़ की ग्रोथ कमजोर रह सकती है. इसलिए खाद की मात्रा मिट्टी की जांच के हिसाब से तय करना बेहतर रहेगा. फास्फोरस, पोटाश समेत जरूरी पोषक तत्वों का बैलेंस फसल की क्वालिटी के लिए अहम है.
सिंचाई करते समय मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें. खेत में पानी जमा न होने दें. ड्रिप इरिगेशन से पानी की मात्रा को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. मौसम, मिट्टी और देखभाल के हिसाब से फसल करीब 90 से 105 दिनों में तैयार हो सकती है. कटाई से पहले हल्की सिंचाई करने पर जमीन से गाजर निकालना आसान हो जाता है.
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ऐसे बढ़ सकती है कमाई
हॉलैंड कैरेट को सिर्फ लोकल मंडी में बेचने के बजाय प्रीमियम मार्केट तक पहुंचाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. बड़े शहरों में रेस्टोरेंट, होटल, कैफे, प्रीमियम सब्जी स्टोर और ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म इसके संभावित खरीदार हैं. इसलिए बुवाई से पहले आसपास के बाजार में इसकी डिमांड और रेट की जानकारी जुटा लेना बेहतर रहेगा.
कटाई के बाद गाजर को अच्छी तरह साफ करके साइज और क्वालिटी के हिसाब से ग्रेडिंग करें. इसके बाद 500 ग्राम, 1 किलो जैसी पैकिंग में इसे बेचा जा सकता है. साफ-सुथरी पैकिंग और सीधे ग्राहक तक पहुंच बनाने से प्रीमियम रेट मिलने का चांस बढ़ता है.
इसकी कमाई का फाइनल आंकड़ा जमीन, पैदावार, खेती की लागत और बिक्री रेट पर निर्भर करेगा. इसलिए बड़े रकबे में खेती शुरू करने से पहले फार्म हाउस के छोटे हिस्से में ट्रायल करना सही रहेगा. अगर फसल की क्वालिटी अच्छी आती है और खरीदार भी आसानी से मिलते हैं.

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