गांव में खेती के बाद अगर कोई काम किसानों को सबसे ज्यादा मुनाफा दिलाता है तो वह है डेयरी फार्मिंग. दूध बेचकर हाथ में जो पैसा आता है उसके ही भरोसे उनके घर का खर्च निकलता है. लेकिन पिछले कुछ समय से महंगाई की मार ने पशुपालकों की कमर तोड़ रखी थी. दाना, हरा चारा और पशुओं की दवाइयों के दाम आसमान छू रहे थे जिसकी वजह से दूध उत्पादन का खर्च लगातार बढ़ रहा था पर कमाई पहले की तरह ही बनी हुई थी.
इसलिए अब डेयरी किसानों राहत देते हुए ओडिशा सरकार की ओर से बड़ा फैसला लिया गया है. राज्य के लाखों डेयरी किसानों के लिए सरकार ने राज्य की प्रमुख दुग्ध सहकारी समिति ओमफेड के जरिए दूध खरीद कीमतों में बढ़ोतरी का बड़ा ऐलान किया है. इस नए फैसले से न सिर्फ छोटे पशुपालकों को अपनी लागत निकालने में मदद मिलेगी. बल्कि गांव की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूंकने का काम होगा.
11 सितंबर से किसानों को मिलेगा ज्यादा पैसा
ओडिशा सरकार की ओर से दूध की खरीद कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर का इजाफा करने का फैसला लिया है. यह बढ़ी हुई कीमत 11 सितंबर 2026 से लागू होगी. सरकार का कहना है कि इस कदम से राज्य के 3 लाख से ज्यादा डेयरी किसानों की इनकम बढ़ाने में मदद मिलेगी. पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री गोकुलानंद मल्लिक के मुताबिक इस फैसले का मकसद किसानों को एक्स्ट्रा इनकम देने के साथ डेयरी सेक्टर को मजबूत करना भी है.
डेयरी किसानों के लिए यह बढ़ोतरी इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि पशु आहार, चारा, दवाइयों, पशु चिकित्सा और ट्रांसपोर्ट जैसे खर्च लगातार उनकी जेब पर असर डाल रहे हैं. रोजाना ज्यादा मात्रा में दूध बेचने वाले किसानों के लिए 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी महीने के हिसाब से अच्छी खासी एक्स्ट्रा कमाई में बदल सकती है.

लाखों किसानों से रोज खरीदा जाता है दूध
ओडिशा में दूध की संगठित खरीद का बड़ा हिस्सा ओडिशा स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन यानी ओमफेड संभालता है. यह फेडरेशन राज्य के करीब 3.24 लाख किसानों से दूध खरीदता है. इसके जरिए रोजाना लगभग 6.70 लाख लीटर दूध की खरीद होती है. यह पूरा नेटवर्क राज्य की 4455 दूध सहकारी समितियों से जुड़ा हुआ है. ऐसे में खरीद कीमत में होने वाला छोटा बदलाव भी बड़ी संख्या में पशुपालकों की कमाई पर असर डालता है.
खासतौर उन परिवारों के लिए डेयरी रोजाना कैश इनकम का जरिया है जो खेती के साथ एक या दो पशु पालकर दूध बेचते हैं. खास बात यह है कि दूध की खरीद कीमत में इस साल यह पहली बढ़ोतरी नहीं है. मई 2026 में भी ओमफेड ने खरीद कीमत में 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. इसके बाद गाय के दूध की खरीद कीमत 39.05 रुपये प्रति लीटर हो गई थी.
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डेयरी किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस फैसले का सीधा फायदा उन पशुपालकों को होगा जो ओमफेड और उससे जुड़ी सहकारी व्यवस्था के जरिए दूध बेचते हैं. बढ़ी हुई खरीद कीमत लागू होने के बाद दूध की सप्लाई के हिसाब से भुगतान में इसका फायदा जुड़ जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि बेहतर खरीद कीमत से ज्यादा पशुपालक संगठित डेयरी नेटवर्क से जुड़ने के लिए आगे आएंगे. इससे किसानों की कमाई के साथ राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.

केंद्र सरकार भी सहकारी डेयरी नेटवर्क को बढ़ाने के लिए श्वेत क्रांति 2.0 जैसी पहल पर काम कर रही है. इसका फोकस डेयरी सहकारी समितियों का दायरा बढ़ाने, रोजगार के नए मौके तैयार करने और इस सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी मजबूत करने पर है. ऐसे में बढ़ी हुई कीमत पशुपालकों को डेयरी से जुड़े रहने के लिए बेहतर सपोर्ट दे सकती है.
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