Sugarcane Farmers: गन्ने की फसल को तैयार करने में किसानों को महीनों लगते हैं. खेत की जुताई, बुवाई, खाद-पानी और कटाई तक काफी खर्च भी होता है. ऐसे में जब गन्ना चीनी मिल तक पहुंचता है और उसकी नाप-तौल में गड़बड़ी या सही दाम न मिलने की शिकायत आती है तो किसानों की कमाई पर इसकी सीधा असर असर पड़ता है.
लेकिन अब किसानों की इन समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की है. सरकार ने गन्ना किसानों की परेशानियों पर सोच-विचार करने के लिए एक संयुक्त समिति बनाने का फैसला किया है. इससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है.
किसानों की समस्याओं पर लंबी बैठक
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को दिल्ली में बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में किसानों की समस्याओं को लेकर तीन से चार घंटे तक बैठक हुई. इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, मंत्री और किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक में किसानों की परेशानियां सुनी गईं और उनका स्थायी हल निकालने पर चर्चा की गई.
सरकार इस मामले में एक संयुक्त समिति बनाएगी. इसमें गन्ना किसान, कृषि वैज्ञानिक और केंद्र-राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह समिति किसानों की समस्याओं को समझेगी और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव देगी. जोशी ने कहा कि किसानों की इन समस्याओं को किसी एक मंत्रालय के लिए अकेले हल करना आसान नहीं है.
गन्ने के दाम और तौल में गड़बड़ी का मुद्दा
बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी FRP, गन्ने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग और चीनी मिलों में तौल से जुड़ी शिकायतों पर चर्चा हुई. किसानों ने आरोप लगाया कि, कटाई के बाद मिल तक गन्ना पहुंचने पर करीब 9 फीसदी वजन की कटौती या बर्बादी दिखाए जाने से उन्हें नुकसान हो सकता है. गन्ने में चीनी की मात्रा का आकलन करने और तौल में गड़बड़ी की शिकायतें भी उठाई गईं. प्रल्हाद जोशी के मुताबिक, राज्य सरकारों को ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की सलाह दी गई है. बैठक में कारोबार में इस्तेमाल होने वाली चीनी के लिए अलग कीमत तय करने की मांग पर भी बात हुई.
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कर्नाटक के किसानों ने भी रखी मांग
बैठक में कर्नाटक के गन्ना किसानों के लिए राज्य निर्धारित मूल्य यानी एसएपी लागू करने की मांग भी उठी. यह वह कीमत होती है, जिसे राज्य सरकार गन्ने के लिए तय करती है. यह केंद्र सरकार की ओर से तय एफआरपी से अलग होती है. किसानों ने मांग की कि कर्नाटक में भी इस व्यवस्था पर विचार किया जाए. इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली में प्रल्हाद जोशी से मुलाकात कर 2026-27 के चीनी सीजन के लिए गन्ने की कीमत और किसानों की समस्याओं पर चर्चा की थी. उन्होंने तौल कम दर्ज करने, तराजू से छेड़छाड़ और परिवहन के दौरान गड़बड़ी की शिकायतें उठाईं. उन्होंने किसानों से सड़क जाम कर आंदोलन करने के बजाय धैर्य रखने की अपील की.
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