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कार्बोसल्फान पर रोक लगा सकती है सरकार, धान-कपास जैसी फसलों में होता है इस्तेमाल

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ABP News
August 11, 20263 min read
कार्बोसल्फान पर रोक लगा सकती है सरकार, धान-कपास जैसी फसलों में होता है इस्तेमाल

धान, कपास और बागवानी फसलों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक कार्बोसल्फान को लेकर सरकार एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी कर रही है. केंद्र सरकार इस पर पूरी तरह रोक लगाने पर विचार कर रही है. इस मामले में अगस्त के अंत तक फैसला आने की उम्मीद है. कृषि मंत्रालय और केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति ने इस केमिकल को Highly Toxic की श्रेणी में रखा है, जिसके बाद सरकार इस पर प्रतिबंध लगाने जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कीटनाशक के इस्तेमाल से न सिर्फ इंसानी सेहत, बल्कि पर्यावरण और मित्र कीटों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है.

केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने की बैन की सिफारिश

केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने कार्बोसल्फान के खतरों की गहन समीक्षा के बाद इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने की सिफारिश सरकार को सौंपी है. सरकार इस पर अंतिम फैसला जल्द ही ले सकती है. अधिकारियों का कहना है कि हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए ऐसे रसायनों को बाजार में बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती जो सीधे तौर पर हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हों.

भारतीय ग्रामीण बाजारों में कार्बोसल्फान मुख्य रूप से FMC India के मार्शल जैसे कई बड़े और लोकप्रिय ब्रांड नामों से बिकता है. धान के तना छेदक और कपास में लगने वाले रसचूसक कीटों को मारने के लिए किसान इसे सबसे कारगर उपाय मानते हैं. यदि सरकार इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देती है, तो ऐसे में कंपनियों को बाजार से इसका स्टॉक वापस लेना होगा और किसानों को इसके सुरक्षित विकल्पों की तलाश करनी होगी.

क्यों लग रहा प्रतिबंध

वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बोसल्फान एक सिस्टेमिक कीटनाशक है, जो पौधों के भीतर तक चला जाता है. जब किसान खेतों में छिड़काव करते है, तो इस दौरान किसानों के शरीर में इसका कुछ जाने से भी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है. साथ ही दुनिया के कई विकसित देशों जैसे यूरोपीय संघ में कार्बोसल्फान पर पहले से ही प्रतिबंध है.

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भारत से निर्यात होने वाले बासमती चावल और कपास में यदि इस केमिकल के अंश पाए जाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कृषि उत्पादों की खरीद खारिज होने का डर रहता है. साथ ही यह कीटनाशक जमीन में मौजूद केंचुओं और हवा में उड़ने वाली मधुमक्खियों जैसे मित्र कीटों को भी मार देता है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती है.

इसका कृषि किसानों पर क्या असर होगा

जानकारों का मानना है कि इस कड़े कदम से भारतीय कृषि उत्पादों की पकड़ अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत होगी. हालांकि, अचानक लगे प्रतिबंध से शुरुआत में किसानों को थोड़ी परेशानी हो सकती है, क्योंकि वे सालों से इस पर निर्भर रहे हैं. लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बाजार में इसके कई जैविक और कम जहरीले रासायनिक विकल्प मौजूद हैं, इनकी मदद से फसल को बचाया जा सकता है.

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