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बरसात में पशुओं में बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा, इन्हें कैसे बचाएं?

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ABP News
August 11, 20264 min read
बरसात में पशुओं में बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा, इन्हें कैसे बचाएं?

Animal Care Tips: बारिश का मौसम इंसानों के साथ पशुओं के लिए भी कई तरह की परेशानियां लेकर आता है. लगातार बारिश, गीली मिट्टी और आसपास जमा पानी की वजह से पशुशाला में नमी बढ़ जाती है. यही माहौल कई तरह के जीवाणु और परजीवियों के लिए अनुकूल बन जाता है. इसका सीधा असर पशुओं की सेहत पर पड़ता है.

पशुपालन करने वाले लोगों के लिए यह समय थोड़ा ज्यादा सतर्क रहने का होता है. क्योंकि पशु बीमार पड़ते हैं तो इलाज पर खर्च बढ़ने के साथ दूध उत्पादन और दूसरी आमदनी पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए बारिश शुरू होते ही पशुओं के रहने की जगह चारे और साफ सफाई पर खास ध्यान देना जरूरी है. जान लें पूरी खबर.

बारिश में इन बीमारियों का रहता है ज्यादा खतरा

बरसात के मौसम में पशुओं में कई तरह के संक्रमण देखने को मिल सकते हैं. इनमें गलघोंटू, लंगड़ा बुखार, खुरपका मुंहपका और दस्त जैसी बीमारियों ज्यादा होती हैं. गलघोंटू बीमारी पास्चुरेला मल्टीसिडा नाम के जीवाणु से जुड़ी होती है. इसमें पशु को तेज बुखार हो सकता है, आंखें लाल दिखाई दे सकती हैं और गर्दन या आगे के हिस्से में सूजन नजर आ सकती है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है.

लंगड़ा बुखार यानी ब्लैक क्वार्टर का खतरा भी बारिश के दौरान बढ़ जाता है. खासकर उन जगहों पर जहां पशु लंबे समय तक गीली मिट्टी के संपर्क में रहते हैं. इस बीमारी के जीवाणु मिट्टी में लंबे समय तक मौजूद रह सकते हैं. इसके अलावा खुरपका मुंहपका रोग में पशु के मुंह, जीभ और खुरों के आसपास छाले दिखाई दे सकते हैं. इससे पशु के खाने और चलने में परेशानी होती है. बारिश में गीला या दूषित चारा खाने से दस्त की समस्या भी हो सकती है.


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पशुशाला को सूखा और साफ रखना सबसे जरूरी

बारिश में पशुओं को बीमारियों से बचाने का सबसे आसान तरीका उनकी रहने की जगह को साफ और सूखा रखना है. पशुशाला में बारिश का पानी किसी भी हालत में जमा नहीं होना चाहिए. अगर फर्श गीला रहता है तो वहां सूखी मिट्टी, भूसा या किसी और सही चीज का इस्तेमाल करके नमी कम की जा सकती है. शेड में हवा की आवाजाही भी ठीक रहनी चाहिए जिससे अंदर उमस और नमी ज्यादा देर तक न टिके.

पशुओं के आसपास गोबर और गंदा पानी जमा न होने दें. रोजाना सफाई जरूर करें इसके अलावा चारे-पानी के बर्तनों को भी साफ रखें. बारिश में चारा जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए पशुओं को ताजा और साफ चारा ही दें. गीला, सड़ा या बदबूदार चारा देने से पेट से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. कोशिश करें कि पशु सीधे गीली मिट्टी या जमा पानी में खड़े न रहें.


बारिश से पहले वैक्सीनेशन और समय पर इलाज जरूरी

पशुओं को बीमारियों से बचाने में वैक्सीनेशन काफी जरूरी होता है. बारिश का मौसम शुरू होने से पहले अपने इलाके में पशु चिकित्सक या पशुपालन विभाग से जाकर टीकाकरण की जानकारी लेनी चाहिए. खासकर गलघोंटू, लंगड़ा बुखार और खुरपका मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव के लिए लोकल पशु चिकित्सा सलाह के हिसाब से टीकाकरण कराना फायदेमंद रहता है. इसके अलावा पशुओं के व्यवहार और शरीर में होने वाले छोटे बदलावों को नजरअंदाज न करें.

अगर पशु अचानक खाना कम कर दे, तेज बुखार हो, शरीर के किसी हिस्से में सूजन दिखे, मुंह में छाले पड़ें या लगातार दस्त हो रहे हों तो खुद से दवा देने के बजाय पशु चिकित्सक से संपर्क करें. बीमार पशु को बाकी पशुओं से अलग रखना भी जरूरी है. जिससे संक्रमण दूसरे पशुओं तक न पहुंचे. थोड़ी सी सावधानी और समय पर देखभाल से बारिश के मौसम में होने वाले कई नुकसान से बचा जा सकता है.

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