महाराष्ट्र में इस समय सूखे का संकट किसानों के लिए लगातार गंभीर होता जा रहा है. कमजोर और असमान मानसून के कारण राज्य के 358 में से 265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं. खरीफ फसलों को नुकसान के बाद अब किसानों के सामने रबी सीजन की चिंता भी खड़ी है.
ऐसे में सवाल है कि किसान उपलब्ध पानी को कैसे बचाएं और अपनी अगली फसल को सूखे की मार से किस तरह सुरक्षित रखें? सरकार ने पानी के इस्तेमाल को लेकर प्राथमिकताएं तय कर दी हैं और किसानों को भी अब फसल तथा सिंचाई की योजना पानी की कमी के हिसाब से बनाने की जरूरत है. ऐसे में जानिए सूखा से राहत पाने के कुछ आसान तरीकों के बारे में.
16 अक्टूबर से लागू होगी पानी की कटौती
महाराष्ट्र सरकार ने 16 अक्टूबर से कम से कम 10 प्रतिशत पानी की कटौती करने का निर्देश दिया है. जल संसाधन विभाग ने बांधों में उपलब्ध पानी की योजना अगस्त 2027 तक के लिए बनाने की बात कही है. हर बांध में अतिरिक्त आपातकालीन पानी का बफर रखने की भी योजना है. सरकार के मुताबिक, सबसे पहले पीने के पानी की जरूरत पूरी होगी, इसके बाद पशुओं और चारे के लिए पानी तथा फिर सिंचाई को प्राथमिकता दी जाएगी. ऐसे में किसानों को रबी की फसल चुनते समय पानी की कमी को ध्यान में रखना बेहद जरूरी होगा.
कम पानी वाली फसलों पर दें ध्यान
किसानों के लिए अपने क्षेत्र की मिट्टी, उपलब्ध नमी और पानी के स्रोत को देखते हुए फसल का चुनाव करना बेहतर होगा. सूखे की स्थिति में कम समय और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को चुनना बेहतर होगा. ऐसे में किसानों को खेत की मिट्टी में मौजूद नमी को बचाने पर भी ध्यान देना चाहिए. जहां सिंचाई की जरूरत है, वहां ड्रिप या माइक्रो-इरिगेशन तकनीक से पानी का इस्तेमाल करने से पानी क इस्तेमाल कम होगा.
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फसल नुकसान का पंचनामा जरूर करवाएं
महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक 265 सूखाग्रस्त तालुकों में फसल नुकसान का आकलन किया जा रहा है. सरकार ने 12 अक्टूबर तक पंचनामे पूरे करने का लक्ष्य रखा है, ताकि प्रभावित किसानों तक सहायता पहुंचाई जा सके. ऐसे में किसान अपने गांव में होने वाले पंचनामे की जानकारी लें और इस बात पर ध्यान दें कि उनकी फसल का नुकसान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो.
फसल बीमा का लाभ लेने में न करें देरी
सूखे से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और सरकारी राहत की प्रक्रिया की जानकारी अपने तहसील कार्यालय या कृषि विभाग से लेनी चाहिए. केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सूखा समेत कई प्राकृतिक जोखिमों के खिलाफ कवरेज उपलब्ध है. वहीं राज्य में हरे और सूखे चारे की कमी की भी रिपोर्ट सामने आई है. ऐसे में किसान उपलब्ध चारे का भंडारण करें और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था पर पहले ही ध्यान दें. सरकार ने भी पेयजल के बाद पशुधन और चारे को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं.
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