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खेत की मेड़ पर उगाएं मोरिंगा, फसल के साथ कमाई में मिलेगा बोनस

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ABP News
October 10, 2026•3 min read
खेत की मेड़ पर उगाएं मोरिंगा, फसल के साथ कमाई में मिलेगा बोनस

भारत के ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्र में आजकल पारंपरिक खेती के साथ-साथ खाली पड़ी जमीनों का सही इस्तेमाल करके अतिरिक्त मुनाफा कमाने का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है. अक्सर किसान अपने मुख्य खेत में तो फसलें उगाते हैं, लेकिन खेत की मेड़ खाली छोड़ देते हैं.

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खेत कि इस खाली पड़ी मेड़ पर मोरिंगा के पेड़ लगाकर किसान मुख्य फसल के साथ-साथ एक शानदार बोनस कमाई कर सकते हैं. मोरिंगा एक बेहद कम लागत और अत्यधिक पौष्टिक फसल है, जिसकी मांग बाजार में साल भर बनी रहती है.

मेड़ पर ही क्यों लगाएं मोरिंगा का पेड़?

खेत की मेड़ पर मोरिंगा लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए किसानों को अलग से कोई अतिरिक्त जमीन या मुख्य खेत का हिस्सा खर्च नहीं करना पड़ता. इसके पौधे सीधे ऊपर की तरफ बढ़ते हैं और इनकी जड़ें बहुत ज्यादा गहराई या चौड़ाई में नहीं फैलतीं, जिससे मुख्य खेत की फसल को कोई नुकसान नहीं पहुंचता. इसके विपरीत, मोरिंगा के पेड़ खेत की मेड़ों को मजबूती देते हैं, जिससे तेज हवाओं या भारी बारीश के समय मिट्टी का कटाव रुकता है. इसके साथ ही, यह मुख्य फसल के लिए एक प्राकृतिक बाड़ का काम भी करते हैं.

कम पानी और कम देखभाल में बंपर पैदावार

मोरिंगा एक बेहद लचीला और मजबूत पौधा है, जिसे बहुत ज्यादा देखभाल या महंगे रासायनिक खादों की जरूरत नहीं होती है. यह सूखी और पथरीली मिट्टी में भी आसानी से फल-फूल सकता है. इसी खेती के लिए सामान्य से कम पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए इसे मेड़ पर लगाने के बाद आपको अलग से सिचांई की बड़ी व्यवस्था नहीं करनी पड़ती. जब आप अपने मुख्य खेत में पानी और खाद देते हैं, तो मेड़ पर लगे मोरिंगा के पौधे वहीं से जरूरी नमी और पोषक तत्व सोख लेते हैं. यह उन इलाकों के किसानों के लिए वरदान है जहां पानी की कमी रहती है.

साल में दो बार फल और चौतरफा मुनाफा

मोरिंगा के पेड़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके हर हिस्से से कमाई की जा सकती है. इसके पेड़ पर साल में दो बार- पहला फरवरी से मार्च और दूसरा सितंबर से अक्टूबर के बीच- भारी मात्रा में फलियां आती हैं. इसके अलावा, मोरिंगा की पत्तियों की मांग भी आयुर्वेदिक दवाओं, सप्लीमेंट्स और ऑर्गेनिक पाउडर बनाने वाली कंपनियों में बहुत ज्यादा है. किसान इसकी फलियों को स्थानीय मंडियों में सब्जी के रूप में बेच सकते हैं और इसकी सूखी पत्तियों को अच्छी कीमत पर कंपनियों को सप्लाई कर सकते हैं. इसके फूल और छाल भी अच्छे दामों पर बिकते हैं.

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लागत ना के बराबर और कमाई है पक्की

एक बार मेड़ पर मोरिंगा के पौधे लगाने के बाद यह पेड़ लगातार 4 से 5 सालों तक अच्छी पैदावार देते रहते हैं. इसमें बीमारी या कीड़े लगने का खतरा बहुत ही कम होता है, जिससे कीटनाशकों का खर्च पूरी तरह बच जाता है. कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर कोई किसान अपने पूरे खेत की मेड़ पर लाइन से मोरिंगा लगा दे, तो वह मुख्य फसल की लागत के बराबर या उससे भी अधिक कमाई सिर्फ इस 'बोनस फसल' से कर सकता है. यह तकनीक छोटे और सीमांत किसानों की आय को दोगुना करने का एक बेहद सरल और व्यावहारिक जरिया साबित हो रही है.

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