खेत में अगर सही समय पर सही फसल लगाई जाए तो कम मेहनत और कम खर्चे में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. इन दिनों मौसम तेजी से बदल रहा है और गर्माहट कम होते ही सर्दियों वाली सब्जियों की डिमांड मार्केट में तेजी से बढ़ने लगी है. अगर आप भी कम लागत में तगड़ी कमाई का प्लान बना रहे हैं. तो अक्टूबर का महीना आपके लिए फायेदमंद साबित नहीं हो सकता है.
इस दौरान खेतों की सही तैयारी और सही वैरायटी लगाकर आप बंपर पैदावार ले सकते हैं. बाजार में ताजी मूली की मांग हमेशा बनी रहती है और अगर ठंड की शुरुआत में ही आपकी फसल तैयार होकर मंडी पहुंच गई. तो मुनाफा दोगुना हो जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि इस सीजन में मूली की खेती कैसे की जाती है और किन बातों का ध्यान रखकर आप अपनी इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
अक्टूबर में ही क्यों करनी चाहिए मूली की बुआई?
अक्टूबर का महीना खेती के लिहाज से बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. इस समय न तो चिलचिलाती धूप होती है और न ही ज्यादा ठंड, बल्कि हल्की गुलाबी ठंड की शुरुआत होती है. जो मूली की फसल की ग्रोथ के लिए एकदम परफेक्ट होती है. जानकारों के मुताबिक इस दौरान मिट्टी में नमी का सही लेवल बना रहता है जिससे बीजों का जर्मिनेशन यानी अंकुरण बहुत ही शानदार तरीके से होता है. अगर आप इस महीने में बुआई करते हैं.
तो पौधे बहुत तेजी से बढ़ते हैं और उनकी जड़ें भी काफी मजबूत और रसीली बनती हैं. इसके अलावा इस मौसम में कीड़े और फंगस का अटैक भी बहुत कम देखने को मिलता है. जिससे फसल को बचाने में ज्यादा केमिकल या दवाइयों पर फालतू खर्च नहीं करना पड़ता है. कुल मिलाकर कम लागत में बंपर पैदावार पाने के लिए अक्टूबर का यह समय किसानों के लिए सबसे बढ़िया मौका लेकर आता है.

खेत की सही तैयारी और उन्नत बीजों का चुनाव
किसी भी फसल की सफलता इस बात पर पूरी तरह निर्भर करती है कि उसकी शुरुआत जमीन पर कैसे हुई है. मूली की खेती के लिए सबसे पहले खेत की मिट्टी को ट्रैक्टर और कल्टीवेटर से अच्छी तरह भुरभुरी बनाना बहुत जरूरी है. इसके लिए खेत की दो-तीन बार अच्छी गहरी जुताई करके पाटा लगा लें जिससे मिट्टी बिल्कुल समतल हो जाए और जलभराव की समस्या कभी न आए. मिट्टी में पुरानी गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाना बेहद फायदेमंद होता है.
क्योंकि इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और मूली की लंबाई व मोटाई बहुत शानदार होती है. बीज हमेशा मार्केट से प्रमाणित और उन्नत किस्म के ही खरीदें जो कम समय में ज्यादा पैदावार दें. बुआई से पहले बीजों का ट्रीटमेंट जरूर कर लें जिससे फंगस जैसी बीमारियां आसपास भी न भटके. कतार से कतार की सही दूरी तय करके बुआई करने से निराई-गुड़ाई और सिंचाई करने में काफी आसानी हो जाती है.
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इन बातों का रखें ध्यान
बुआई के बाद मूली की फसल को समय पर पानी देना बहुत ज्यादा जरूरी होता है. हालांकि इस बात का हमेशा खास ख्याल रखें कि खेत में पानी बिल्कुल भी रुकना नहीं चाहिए. वरना जड़ें अंदर ही अंदर सड़ सकती हैं. हल्की और नियमित सिंचाई करने से मूली एकदम सॉफ्ट, सफेद और स्वादिष्ट बनती है. समय-समय पर खेतों से खरपतवारों को बाहर निकालते रहें जिससे पौधों को मिट्टी से पूरा पोषण मिल सके.
बुआई के महज 45 से 50 दिनों के भीतर ही मूली की फसल जमीन से खुदाई के लिए बिल्कुल तैयार हो जाती है. मंडी में इसकी बंपर डिमांड होने के चलते किसानों को इसके दाम भी बहुत शानदार मिल जाते हैं. कम लागत, कम समय और बेहतरीन रिटर्न के चलते यह फसल छोटे किसानों के लिए मालामाल बनने का एक बहुत ही शानदार जरिया साबित हो रही है.

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