खेती से अच्छी कमाई के लिए किसान नई तरह की सब्जियां भी उगा रहे हैं. इनमें लेट्यूस भी शामिल है. इसे सलाद पत्ता कहते हैं. इसका इस्तेमाल सलाद के अलावा बर्गर और सैंडविच में होता है. इसकी हरी और लाल पत्तियों वाली कई किस्में मिलती हैं. किसान इसे उगाने से पहले आसपास के बाजार में पता कर लें कि कौन इसे खरीदेगा. क्योंकि अगर यह पहले ही पता कर लेंगे तो फसल को बेचने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी.
अगर आप लेट्यूस की खेती करना चाहते हैं तो फिर इसके लिए बहुत ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होगी. आप कम जमीन पर भी इसकी खेती कर सकते हैं. इसकी अच्छी फसल के लिए सही मौसम और बीज चुनना जरूरी है. मिट्टी में नमी बनाए रखने से लेकर समय पर कटाई करने तक ध्यान देना पड़ता है. पत्तियां अच्छी हों और समय पर बिक जाएं तो अच्छी कमाई की जा सकती है. जान लीजिए बुवाई से कटाई तक किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
कौन सी वैरायटी लगाना रहेगा सही?
लेट्यूस ठंडे मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है. ज्यादा गर्मी में इसके पौधे जल्दी फूल निकाल सकते हैं और पत्तियां कड़वी हो सकती हैं. बुवाई किस वक्त करनी है यह आपके इलाके के मौसम पर डिपेंड करता है. मैदानी इलाकों में ठंड शुरू होने का समय इसके लिए अनुकूल हो सकता है. पहाड़ी क्षेत्रों में बुवाई का समय अलग रहेगा. सही महीने की जानकारी के लिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह ले सकते हैं.
लेट्यूस में क्रिस्पहेड और लूज लीफ के अलावा रोमाइन जैसी किस्में मिलती हैं. सभी के पत्तों का आकार और तैयार होने का समय अलग होता है. किसी एक किस्म को हर जगह ज्यादा मुनाफा देने वाली नहीं माना जा सकता. बीज खरीदने से पहले स्थानीय दुकानदारों और रेस्टोरेंट मालिकों से पूछें कि उन्हें किस तरह का सलाद पत्ता चाहिए. इसके बाद अपने इलाके के लिए सही किस्म चुनें. भरोसेमंद जगह से बीज खरीदें और पैकेट पर लिखी बुवाई संबंधी जानकारी पढ़ें.

मिट्टी तैयार करके ऐसे लगाएं पौधे
लेट्यूस के लिए ऐसी मिट्टी अच्छी रहती है जिसमें नमी बनी रहे लेकिन पानी जमा न हो. खेत की मिट्टी को भुरभुरा कर लें. अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं. तैयार कम्पोस्ट भी इस्तेमाल कर सकते हैं. पानी निकलने का रास्ता भी रखें. खेत में खाद की जरूरत कितनी है. यह मिट्टी की जांच से पता चलेगा. बिना जरूरत ज्यादा खाद मत डालें इससे पौधों को नुकसान पहुंच सकता है.
इसके बीज सीधे खेत में बो सकते हैं. नर्सरी में पौधे तैयार करके भी लगा सकते हैं. नर्सरी की करीब तीन से चार सप्ताह की स्वस्थ पौध रोपाई के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. पौधों के बीच दूरी किस्म के हिसाब से रखें. बड़े आकार वाली किस्मों को ज्यादा जगह चाहिए. रोपाई के बाद हल्का पानी दें. मिट्टी को पूरी तरह सूखने न दें. जब आप खरपतवार निकाल रहे हों तो यह देखें कि जड़ को नुकसान न पहुंचा दे क्योंकि इसकी जड़ें मिट्टी की ऊपरी परत के पास होती हैं. पत्तियों में कीड़े और धब्बे नजर आएं तो तुरंत उपचार करें.
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इतनी हो सकती है कमाई
लेट्यूस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है. रोपाई के महज साठ से अस्सी दिनों के भीतर पौधे कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं. इसकी कटाई करते समय इस बात का ध्यान रखें कि पत्ते ताजे और क्रिस्पी हों, इसलिए सुबह के वक्त इसकी हार्वेस्टिंग करना सबसे अच्छा माना जाता है. कटाई हो जाने बाद पत्तों को ठीस से साफ कर लें और उनकी अच्छे से पैकेजिंग करें. जिससे कि वे मुरझाए बिना लंबे समय तक फ्रेश दिखें.

आजकल शहरी इलाकों में सलाद पत्तों की डिमांड आसमान छू रही है. इसलिए आप इसे सीधे लोकल सुपरमार्केट, होटल, रेस्टोरेंट या थोक मंडियों में सप्लाई कर सकते हैं. थोक भाव में बेचने के अलावा अगर आप इसे खुद पैक करके बेचते हैं. तो मुनाफा और भी ज्यादा हो जाता है. एक एकड़ जमीन में इसकी फसल उगाने पर किसान आसानी से 2 से 3 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं. क्योंकि बाजार में इसके पत्ते 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक के भाव में बिकते हैं.
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